हिंदी सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर फिल्म निर्देशक और निर्माता संजय गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे। ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’, ‘जिंदा’ और ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ जैसी चर्चित फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने वाले संजय गुप्ता का 30 अक्टूबर 2026 को मुंबई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे। उनके अचानक चले जाने की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी उनके निधन की पुष्टि करते हुए उन्हें अपना करीबी मित्र और जुनूनी फिल्मकार बताया।
संजय गुप्ता के निधन की वजह घर में अचानक गिरने से लगी सिर की गंभीर चोट बताई जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वह मुंबई के वर्सोवा स्थित अपने घर में गिर पड़े थे। पुलिस के अनुसार, आशंका है कि उनका पैर फिसला और गिरने के कारण सिर में गंभीर चोट आई। घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस मामले में वर्सोवा पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी संदिग्ध परिस्थिति या गड़बड़ी के संकेत नहीं मिले हैं और मामले की जांच जारी है।
संजय गुप्ता का फिल्मी सफर करीब तीन दशकों तक फैला रहा। वह अपनी फिल्मों में शहरी अपराध, अंडरवर्ल्ड, गैंगस्टर और एक्शन की कहानियों को अलग अंदाज में पेश करने के लिए पहचाने जाते थे। उनकी फिल्मों में दमदार संवाद, स्टाइलिश एक्शन और सस्पेंस का खास मेल देखने को मिलता था। उन्होंने वर्ष 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा था। इस फिल्म में संजय दत्त, आदित्य पंचोली और रवीना टंडन जैसे कलाकार नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने ‘राम शास्त्र’, ‘खौफ’, ‘जंग’ और ‘मुसाफिर’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान मजबूत की।
अभिनेता संजय दत्त के साथ संजय गुप्ता की जोड़ी को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया। दोनों ने कई यादगार फिल्मों में साथ काम किया। साल 2002 में रिलीज हुई ‘कांटे’ उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी और अन्य कलाकार नजर आए थे। इसके बाद ‘मुसाफिर’ और ‘जिंदा’ जैसी फिल्मों में भी उनका अलग फिल्मांकन देखने को मिला। साल 2007 में आई ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ ने उनके करियर को एक नई पहचान दी। मुंबई के वर्ष 1991 के लोखंडवाला मुठभेड़ कांड से प्रेरित इस फिल्म में उन्होंने निर्देशन के साथ निर्माण और सह-लेखन की जिम्मेदारी भी निभाई थी।
इसके बाद वर्ष 2013 में उन्होंने ‘शूटआउट एट वडाला’ का निर्देशन किया। यह फिल्म भी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित अपराध कथा पर आधारित थी। इसके अलावा ‘जज्बा’, ‘काबिल’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अलग-अलग विषयों पर काम किया। उनकी फिल्मों की खासियत यह रही कि उन्होंने अपराध और एक्शन की कहानियों को बड़े पर्दे पर एक विशिष्ट दृश्य शैली के साथ पेश किया।
निर्देशन के अलावा संजय गुप्ता ने निर्माता के रूप में भी अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने वर्ष 2001 में अपने प्रोडक्शन बैनर ‘व्हाइट फेदर फिल्म्स’ की शुरुआत की थी। इस बैनर के तहत उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण किया। उनके हालिया प्रोजेक्ट्स में ‘द मिरांडा ब्रदर्स’ और ‘विस्फोट’ जैसी फिल्में शामिल हैं। फिल्म निर्माण में आने से पहले उन्होंने पोस्ट-प्रोडक्शन और साउंड डिजाइन के क्षेत्र में भी काम किया था। उन्होंने निर्देशक पंकज पाराशर के साथ टेलीविजन धारावाहिक ‘करमचंद’ और फिल्म ‘जलवा’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भी काम किया था।
संजय गुप्ता के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। निर्माता अशोक पंडित ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वह शानदार कहानीकार और जिंदगी से भरपूर व्यक्तित्व वाले इंसान थे। अभिनेता तुषार कपूर ने भी उनके निधन पर दुख जताया और सोशल मीडिया पर लिखा कि सुबह उठते ही अपने प्रिय निर्देशक के अचानक चले जाने की खबर सुनकर वह स्तब्ध हैं। उन्होंने संजय गुप्ता के परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। वहीं कमाल आर. खान ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि वह उनसे अक्सर फिल्मों और बॉलीवुड को लेकर बातचीत करते थे और उनकी कमी हमेशा महसूस होगी।
संजय गुप्ता का जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए अपराध, एक्शन और सस्पेंस को एक अलग अंदाज में पर्दे पर उतारा। ‘कांटे’ से लेकर ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ तक उनकी कई फिल्में दर्शकों के बीच आज भी याद की जाती हैं। उनके निधन से फिल्म जगत ने एक ऐसे निर्देशक को खो दिया, जिसकी अपनी अलग पहचान और फिल्म बनाने की विशिष्ट शैली थी।
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