रेणुकास्वामी मर्डर केस में एक ऐसा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है, जो आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई को प्रभावित कर सकता है। बेंगलुरु की अदालत ने आरोपी नंबर-14 प्रदोष एस. राव की माफी की अर्जी मंजूर कर उन्हें सरकारी गवाह बनने की अनुमति दे दी है। अब प्रदोष आरोपी के बजाय अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में मामले से जुड़े तथ्य अदालत के सामने रखेंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें पूरी और सही जानकारी देनी होगी।
बेंगलुरु की सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट, यानी CCH-59 ने बुधवार को यह आदेश दिया। प्रदोष राव ने अदालत में सरकारी गवाह यानी अप्रूवर बनने के लिए अर्जी दाखिल की थी। अदालत की मंजूरी के बाद अब उनसे अपेक्षा की जाएगी कि वह मामले से जुड़े घटनाक्रम और अपनी जानकारी का खुलासा करें। उनकी गवाही में क्या सामने आता है, इस पर अब सबकी नजर रहेगी।
इस मामले में प्रदोष की सरकारी गवाह बनने की प्रक्रिया पहले भी कानूनी चुनौती का सामना कर चुकी थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 8 सितंबर को ट्रायल कोर्ट के पहले आदेश को प्रक्रिया से जुड़ी खामियों के आधार पर रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने मामले को दोबारा ट्रायल कोर्ट के पास भेजते हुए कानून के अनुसार नए सिरे से आदेश देने को कहा था। अब ट्रायल कोर्ट ने प्रदोष की अर्जी पर दोबारा विचार करके उसे स्वीकार कर लिया है।
प्रदोष राव ने अपनी याचिका में कथित हत्या की साजिश, सबूतों को ठिकाने लगाने और मामले में शामिल दूसरे लोगों की भूमिका से जुड़ी जानकारी देने की बात कही थी। अभियोजन पक्ष ने भी उनकी अर्जी का समर्थन किया। अदालत के सामने यह दलील रखी गई कि मामले में कुछ गवाह अभियोजन पक्ष का पूरी तरह समर्थन नहीं कर पाए हैं और मुकदमे में महत्वपूर्ण घटनाओं की कड़ियां जोड़ने के लिए अतिरिक्त जानकारी की जरूरत है।
हालांकि, सरकारी गवाह बनने का मतलब यह नहीं है कि प्रदोष को सभी आरोपों से बिना शर्त राहत मिल गई है। उन्हें अदालत के सामने मामले से संबंधित तथ्यों का पूरा और सही खुलासा करना होगा। अगर वह महत्वपूर्ण जानकारी छिपाते हैं, झूठी गवाही देते हैं या माफी की शर्तों का पालन नहीं करते, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है और उन्हें दोबारा आरोपी बनाया जा सकता है।
अब जानते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है।
रेणुकास्वामी हत्याकांड जून 2024 में सामने आया था। चित्रदुर्ग के रहने वाले रेणुकास्वामी की हत्या के मामले में कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीपा, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के आरोपों के मुताबिक, रेणुकास्वामी ने सोशल मीडिया पर पवित्रा गौड़ा को आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। आरोप है कि इसी विवाद के बाद उन्हें अगवा किया गया और प्रताड़ित किया गया। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होना है।
इस मामले में दर्शन थूगुदीपा आरोपी नंबर-2 हैं, जबकि प्रदोष राव आरोपी नंबर-14 थे। अभियोजन के आरोपों के मुताबिक, प्रदोष कथित घटनास्थल पर पहुंचे थे और बाद की घटनाओं में भी उनकी भूमिका रही। अब सरकारी गवाह बनने के बाद उनकी ओर से दी जाने वाली जानकारी मुकदमे की सुनवाई में अहम हो सकती है।
दर्शन की ओर से प्रदोष को सरकारी गवाह बनाए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। इस कानूनी विवाद के बावजूद ट्रायल कोर्ट ने अब उनकी माफी की अर्जी मंजूर कर ली है। अदालत के इस फैसले के बाद मुकदमे में अगला महत्वपूर्ण चरण प्रदोष की गवाही होगी।
अब सवाल है कि प्रदोष अदालत में क्या-क्या खुलासा करते हैं और उनकी गवाही से अभियोजन पक्ष के मामले पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अदालत ने उन्हें सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी है, लेकिन उनकी गवाही की विश्वसनीयता और महत्व का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगा।
रेणुकास्वामी हत्याकांड में यह नया घटनाक्रम मामले की आगे की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर अदालत में होने वाली अगली कार्यवाही और प्रदोष राव के बयान पर टिकी रहेगी।
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