महाराष्ट्र में आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी ATS ने बड़ा अभियान चलाते हुए भंडारा और चंद्रपुर जिलों में कई जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह कार्रवाई उन संदिग्ध लोगों के खिलाफ की गई है, जिन पर सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान आधारित आतंकी Shehzad Bhatti से जुड़े होने का शक है।
जानकारी के मुताबिक, ATS ने संदिग्धों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया अकाउंट्स को जांच के दायरे में लिया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इन लोगों का संबंध किसी कट्टरपंथी विचारधारा या आतंकी नेटवर्क से तो नहीं है। महाराष्ट्र ATS की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर शहजाद भट्टी का नाम सुर्खियों में आ गया है।
बताया जा रहा है कि Shehzad Bhatti का नाम पिछले कुछ महीनों में आतंकियों की भर्ती, ऑनलाइन कट्टरपंथ फैलाने और जासूसी गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में सामने आ चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय एजेंसियों ने उसके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं।
शहजाद भट्टी मूल रूप से पाकिस्तान के लाहौर का रहने वाला बताया जाता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पिछले कई वर्षों से दुबई और मध्य पूर्व के अन्य देशों से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा है। एजेंसियों का कहना है कि वह पाकिस्तान, यूएई और अन्य देशों के बीच लगातार यात्रा करता रहा है, जिससे उसकी गतिविधियों पर नजर रखना और मुश्किल हो जाता है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भट्टी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को निशाना बनाता था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों के युवाओं को पैसे, ताकत और पहचान का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश की जाती थी। उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता था कि वे “हीरो” बन जाएंगे और समाज में उनकी अलग पहचान बनेगी।
इंटेलिजेंस अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा भर्ती नेटवर्क ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए संचालित किया जाता था। सोशल मीडिया चैट, ग्रुप्स और डिजिटल संपर्कों के माध्यम से युवाओं को धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा की तरफ धकेला जाता था। यही वजह है कि ATS अब डिजिटल सबूतों और ऑनलाइन गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियों को यह भी आशंका है कि Shehzad Bhatti को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का संरक्षण प्राप्त हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, वह एक अहम ऑपरेटिव के तौर पर काम कर रहा है और भारत विरोधी गतिविधियों में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
भारतीय एजेंसियां उसे भारत लाकर अदालत में पेश करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन मामला आसान नहीं माना जा रहा। अधिकारियों का कहना है कि भट्टी भारतीय नागरिक नहीं है और वह कभी भारत आया भी नहीं। इसी वजह से उसका प्रत्यर्पण कानूनी और अंतरराष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों के कारण जटिल बन गया है।
फिलहाल जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता उसके भर्ती नेटवर्क को तोड़ना और उससे जुड़े लोगों की पहचान करना है। महाराष्ट्र ATS की हालिया छापेमारी को इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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