भारतीय कुश्ती की उम्मीदें अब युवा पहलवान Sujit पर टिकी हुई हैं, जो एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने के मिशन के साथ Bishkek में उतरने जा रहे हैं। 65 किलो फ्रीस्टाइल वर्ग में उनसे स्वर्ण पदक जीतकर भारत के सात साल के सूखे को खत्म करने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि इस वर्ग में भारत को आखिरी बार 2019 में Bajrang Punia ने गोल्ड दिलाया था। इसके बाद से भारत इस वजन वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल नहीं कर पाया है।
23 वर्षीय सुजीत इस समय शानदार फॉर्म में हैं और इस साल अब तक अपराजित रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर खुद को खिताब का प्रबल दावेदार साबित किया है।
हालांकि, 65 किलो वर्ग में मुकाबला आसान नहीं रहने वाला है। जापान के ताकारा सूदा, उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव और ईरान के पेयमान नेमाती जैसे मजबूत पहलवान उन्हें कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
हरियाणा के चरखी दादरी से आने वाले सुजीत की कहानी काफी प्रेरणादायक है। शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत और परिवार के समर्थन से खुद को निखारा। उनके पिता भी राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं, जिससे उन्हें खेल की अच्छी समझ मिली।
साल 2021 में सोनीपत में प्रशिक्षण शुरू करने के बाद उनके प्रदर्शन में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने जापान, रूस और मंगोलिया जैसे देशों में ट्रेनिंग लेकर अपनी तकनीक और रणनीति को और मजबूत किया।
ओलंपिक क्वालीफिकेशन में मिली निराशा के बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया।
अब बिश्केक में होने वाली इस चैंपियनशिप में सुजीत के पास खुद को साबित करने और भारत को गोल्ड दिलाने का सुनहरा मौका है। अगर वह सफल होते हैं, तो भारतीय कुश्ती को एक नया सितारा मिल सकता है।
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