अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) को लंबे समय तक मुख्य रूप से लड़कों से जुड़ी समस्या माना जाता रहा है। लेकिन एक नई स्टडी ने संकेत दिया है कि लड़कियों में इसके लक्षण अक्सर पहचान में नहीं आते और उन्हें अनदेखा करने के गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं। शोध के अनुसार, जिन लड़कियों में बचपन से ADHD के लक्षण मौजूद होते हैं, उनमें युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते हृदय रोग, डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
अध्ययन में 18 से 32 वर्ष की लगभग 1.20 लाख महिलाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं में बचपन के दौरान ADHD के लक्षण थे, विशेष रूप से आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि की महिलाओं में, आगे चलकर एक से अधिक शारीरिक और मानसिक बीमारियों का खतरा अधिक देखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, लड़कियों में ADHD के लक्षण अक्सर लड़कों की तुलना में अलग तरीके से दिखाई देते हैं। कई लड़कियां अत्यधिक शरारती या आक्रामक नहीं होतीं, इसलिए उनके ध्यान की कमी, बार-बार भूलना, काम पर फोकस न कर पाना या मानसिक बेचैनी जैसे संकेत सामान्य व्यवहार समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। यही वजह है कि कई मामलों में समय पर पहचान और उपचार नहीं हो पाता।
शोध यह भी बताता है कि ADHD केवल बचपन का व्यवहार संबंधी विकार नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो जीवनभर व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। समय पर पहचान और उचित देखभाल न मिलने पर इसके प्रभाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
अध्ययन में आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शिक्षा, आय, आवास, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसे सामाजिक निर्धारक व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जिन बच्चों का पालन-पोषण संसाधनों की कमी, लगातार तनाव या प्रतिकूल परिस्थितियों में होता है, उनमें ADHD और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
ADHD के सामान्य लक्षणों में एक जगह लंबे समय तक न बैठ पाना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, बिना सोचे-समझे निर्णय लेना, बार-बार भूलना, काम अधूरा छोड़ देना और आसानी से ध्यान भटक जाना शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और इनका मूल्यांकन केवल प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा किया जाना चाहिए।
अध्ययन के अनुसार, बचपन में ADHD के लक्षण वाली महिलाओं में आगे चलकर डिप्रेशन, एंग्जायटी डिसऑर्डर, पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) और बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी अधिक पाया गया। इसके साथ ही कुछ मामलों में डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा हुआ देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी बच्चे, विशेषकर लड़की, में लंबे समय तक ध्यान की कमी, व्यवहार में बदलाव या पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में लगातार कठिनाई दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। समय पर पहचान, उचित उपचार और परिवार का सहयोग ADHD से जुड़े दीर्घकालिक प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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