भारत के बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank को लेकर अमेरिका से बड़ी खबर सामने आई है। बैंक और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में प्रतिभूति धोखाधड़ी से जुड़ा एक क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। इस खबर के सामने आने के बाद अमेरिकी बाजार में बैंक के ADR निवेशकों के बीच भी हलचल बढ़ गई है।
आखिर HDFC Bank पर आरोप क्या हैं और निवेशकों ने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया है? जानकारी के मुताबिक, यह मुकदमा निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी की ओर से न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में दायर किया गया है। मामले में HDFC Bank के साथ बैंक के CEO शशिधर जगदीशन और CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी पक्ष बनाया गया है।
यह मुकदमा उन निवेशकों की ओर से दायर किया गया है, जिन्होंने 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच HDFC Bank के अमेरिकी डिपॉजिटरी रिसीट यानी ADR खरीदे थे। मामले का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम यानी MSRDC से जुड़ा कथित जमा समझौता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि HDFC Bank ने MSRDC की जमा राशि हासिल करने के लिए सामान्य बचत दर से ज्यादा ब्याज देने की व्यवस्था की। आरोप के मुताबिक, निगम की जमा राशि पर करीब 6.01 प्रतिशत ब्याज देने का वादा किया गया था, जबकि सामान्य बचत खातों पर करीब 3.5 प्रतिशत की दर लागू थी।
मुकदमे में आरोप है कि इस अतिरिक्त राशि को सीधे ब्याज के रूप में दिखाने के बजाय कथित तौर पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के मार्केटिंग खर्च के तौर पर दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच करीब 45 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि MSRDC तक पहुंचाई गई और कथित तौर पर इसे तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं के जरिए अभियान के खर्च के रूप में दिखाया गया।
निवेशकों ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंक की आंतरिक सतर्कता जांच में इस व्यवस्था को भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों और बैंक की एंटी-ब्राइबरी नीतियों के खिलाफ माना गया था। मुकदमे में दावा किया गया है कि बैंक ने अमेरिकी प्रतिभूति नियामक के सामने दाखिल अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आंतरिक वित्तीय नियंत्रण को प्रभावी बताया, जबकि कथित अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
इस मामले में 18 मार्च 2026 की घटना का भी जिक्र किया जा रहा है। उस दिन HDFC Bank के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे में बैंक के भीतर कुछ गतिविधियों और प्रथाओं का जिक्र किया गया था, जिन्हें उन्होंने अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं बताया था।
इसके बाद अमेरिकी बाजार में HDFC Bank के शेयरों में करीब 7.28 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी। इसके बाद 27 मई को बैंक से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी बाजार में HDFC Bank के शेयरों में करीब 4.1 प्रतिशत की और गिरावट आई। अब मुकदमे की खबर सामने आने के बाद बैंक के ADR में भी कमजोरी देखने को मिली।
निवेशकों ने अमेरिकी Securities Exchange Act की धारा 10(b) और 20(a) के तहत कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने क्लास एक्शन की मान्यता, मुआवजे और जूरी के सामने सुनवाई की मांग भी की है।
हालांकि, इस पूरे मामले में HDFC Bank का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। बैंक ने आरोपों को खारिज किया है। बैंक का कहना है कि अमेरिकी बाजार में शेयरों में गिरावट के बाद इस तरह के मुकदमे अक्सर सामने आते हैं और उसे इस मामले में कोई ठोस आधार नजर नहीं आता। बैंक ने कहा है कि वह अदालत में इन आरोपों का मजबूती से बचाव करेगा।
इसलिए फिलहाल यह याद रखना जरूरी है कि ये आरोप हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है। किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत में सुनवाई के दौरान क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या निवेशकों के आरोप साबित होते हैं।
फिलहाल इस मुकदमे ने HDFC Bank की कॉरपोरेट गवर्नेंस, वित्तीय रिपोर्टिंग और अमेरिकी निवेशकों के भरोसे को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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