अगर आपको लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, त्वचा का पीला पड़ना या थोड़ी सी मेहनत के बाद सांस फूलने जैसी समस्या महसूस होती है, तो इसे सिर्फ सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। ये लक्षण एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी से जुड़े हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, ताकि पता चल सके कि शरीर में हीमोग्लोबिन कम क्यों है।
एनीमिया तब होता है जब शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन नहीं होता। हीमोग्लोबिन का मुख्य काम शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाना है। जब इसकी मात्रा कम होती है, तो थकान और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
भारत में एनीमिया एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है और महिलाओं में इसका जोखिम खास तौर पर अधिक देखा जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें आयरन की कमी प्रमुख कारणों में से एक है। लेकिन हर एनीमिया सिर्फ आयरन की कमी के कारण नहीं होता। इसलिए बिना जांच के खुद से आयरन की दवा लेना सही तरीका नहीं है।
अब बात करते हैं भीगी हुई किशमिश की। एनीमिया में कई लोगों को सुबह भीगी किशमिश खाने की सलाह दी जाती है। किशमिश में कुछ मात्रा में आयरन जरूर पाया जाता है, लेकिन सिर्फ किशमिश खाने से एनीमिया ठीक हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं है। आयरन की जरूरत पूरी करने के लिए पूरी डाइट का संतुलित होना जरूरी है।
अगर आप किशमिश को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं, तो उसके साथ Vitamin C वाले खाद्य पदार्थ लेना उपयोगी हो सकता है। Vitamin C शरीर में पौधों से मिलने वाले non-heme iron के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसलिए आयरन वाले भोजन के साथ नींबू, आंवला, अमरूद, संतरा या अन्य Vitamin C युक्त फल-सब्जियां शामिल की जा सकती हैं।
आयरन के अच्छे स्रोतों में दालें, चना, राजमा, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल, कुछ सूखे मेवे और आयरन से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। अगर आप मांसाहारी भोजन करते हैं, तो मांस और कुछ अन्य पशु-आधारित खाद्य पदार्थ भी आयरन के स्रोत हो सकते हैं।
गुड़ और चुकंदर को भी अक्सर खून बढ़ाने वाले भोजन के तौर पर बताया जाता है, लेकिन इन्हें एनीमिया का इलाज समझना सही नहीं है। खासकर चुकंदर में आयरन की मात्रा इतनी अधिक नहीं होती कि सिर्फ इसे खाने से हीमोग्लोबिन की कमी पूरी हो जाए।
इसके अलावा चाय और कॉफी को आयरन वाले भोजन के तुरंत साथ लेने से बचना उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इनमें मौजूद कुछ यौगिक आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं।
अगर आपको लंबे समय से कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना या त्वचा का पीला पड़ना महसूस हो रहा है, तो CBC और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी जांच कराना बेहतर है। एनीमिया का कारण पता चलने के बाद ही सही उपचार तय किया जाता है।
इसलिए भीगी किशमिश को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इसे एनीमिया का इलाज मानना सही नहीं होगा। संतुलित आयरन युक्त भोजन, Vitamin C और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से उपचार—यही खून की कमी से निपटने का बेहतर तरीका है।
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