दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। जुलाई 2026 से राजधानी के कई इलाकों में बिजली के बिल बढ़ने वाले हैं। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन यानी DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को बढ़ी हुई बिजली खरीद लागत उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति दे दी है।
यह बढ़ोतरी फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज यानी FPPAS या PPAC के माध्यम से लागू की जाएगी। इसका असर अलग-अलग बिजली वितरण कंपनियों के ग्राहकों पर अलग-अलग पड़ेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वी और मध्य दिल्ली में BSES यमुना पावर लिमिटेड यानी BYPL के उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है। यहां बिजली बिल में लगभग 5.7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है।
वहीं दक्षिण और पश्चिम दिल्ली में BSES राजधानी पावर लिमिटेड यानी BRPL के उपभोक्ताओं के बिल में करीब 3.4 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
हालांकि टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड यानी TPDDL के ग्राहकों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां PPAC में बहुत मामूली बदलाव हुआ है। यह 15.9 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत हुआ है, जिसका असर बेहद सीमित रहने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार, संशोधित सरचार्ज जून महीने में लागू किया जाएगा और इसका असर जुलाई के बिजली बिलों में दिखाई देगा। इसका मतलब है कि अगले महीने से लाखों उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।
दरअसल, PPAC एक ऐसी व्यवस्था है जिसके जरिए बिजली वितरण कंपनियां ईंधन और बिजली खरीदने की बढ़ी हुई लागत की भरपाई करती हैं। बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयला और प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है। ऐसे में जब इन ईंधनों की कीमत बढ़ती है तो बिजली उत्पादन और खरीद की लागत भी बढ़ जाती है।
दिल्ली में बिजली खरीद किसी भी वितरण कंपनी के कुल खर्च का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा होती है। यही कारण है कि लागत बढ़ने पर उसका सीधा असर उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वैश्विक ईंधन कीमतों और ऊर्जा बाजार की स्थिति का असर बिजली दरों पर पड़ सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को बिजली बचाने और ऊर्जा दक्ष उपकरणों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो अपने बिजली सप्लायर की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि आपको पहले से पता चल सके कि आपके बिल पर कितना अतिरिक्त असर पड़ सकता है।
फिलहाल यह फैसला लाखों परिवारों और व्यवसायों के मासिक बजट पर असर डाल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब घरेलू खर्च पहले से ही बढ़ रहे हैं।
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