समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडे ने भारतीय जनता पार्टी के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी छोड़ने या भाजपा में शामिल होने जैसी खबरें पूरी तरह निराधार और अफवाह हैं।
गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सनातन पांडे ने कहा कि समाजवादी पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं है और हाल ही में हुई बैठकों का उद्देश्य केवल आगामी कार्यक्रमों की रणनीति तैयार करना था।
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम की तैयारी को लेकर चर्चा की गई थी और इसी उद्देश्य से बैठक आयोजित की गई थी। इसके अलावा पार्टी में किसी प्रकार की नाराज़गी या टूट की स्थिति नहीं है।
सनातन पांडे ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा लगातार इस तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है।
उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सत्ता में बने रहने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है। उनके मुताबिक भाजपा किसानों, युवाओं, गरीबों और संविधान की चिंता करने के बजाय केवल राजनीतिक लाभ पर ध्यान दे रही है।
सनातन पांडे ने कहा कि भाजपा अवसरवादी राजनीति करती है और दूसरी पार्टियों को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम का भी उदाहरण दिया और कहा कि छोटी राजनीतिक पार्टियों में अचानक बड़े पैमाने पर नेताओं का शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।
इसके अलावा, उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओपी राजभर के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राजभर के बयान को हास्यास्पद और अप्रत्याशित बताया।
सनातन पांडे ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल समाजवादी पार्टी को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पार्टी पूरी तरह एकजुट है और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी में जुटी हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब राजनीतिक प्रचार और वास्तविक मुद्दों के बीच का अंतर समझने लगी है। किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक दावे की पुष्टि आधिकारिक तथ्यों और घटनाक्रम के आधार पर ही की जानी चाहिए।
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