वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने एयरलाइन उद्योग के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जेट फ्यूल महंगा होने से जहां अधिकांश एयरलाइंस के खर्च बढ़ रहे हैं, वहीं Delta Air Lines इस संकट के बीच फायदा कमा रही है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे जेट ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है। जेट फ्यूल एयरलाइंस की कुल लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर मुनाफे पर पड़ता है।
लेकिन डेल्टा एयरलाइंस ने साल 2012 में एक रणनीतिक कदम उठाते हुए पेंसिल्वेनिया में ट्रेनर रिफाइनरी को खरीद लिया था। उस समय इसे जोखिम भरा फैसला माना गया था, लेकिन अब यही निर्णय कंपनी के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
अपनी खुद की रिफाइनरी होने के कारण डेल्टा को ईंधन की सप्लाई के लिए बाहरी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे कंपनी बाजार की अस्थिरता से बच जाती है और लागत को नियंत्रित रख पाती है।
कंपनी के सीईओ एड बैस्टियन के अनुसार, इस रिफाइनरी से आने वाले समय में कंपनी की आय को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केवल एक तिमाही में ही डेल्टा को इस फैसले से सैकड़ों मिलियन डॉलर का फायदा होने की उम्मीद है।
वहीं, अन्य एयरलाइंस जहां ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रही हैं, वहां डेल्टा की यह रणनीति उसे प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अन्य एयरलाइंस भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकती हैं।
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