स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय टेबल टेनिस की उभरती हुई स्टार दिव्यांशी भौमिक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए WTT Feeder Pristina प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीत लिए हैं। महज 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने महिला एकल और महिला युगल दोनों वर्गों में गोल्ड मेडल अपने नाम कर भारतीय खेल जगत को गौरवान्वित किया है।
दिव्यांशी इस उपलब्धि को हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी बन गई हैं। उनके शानदार प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नई खेल प्रतिभा को पहचान दिलाई है।
महिला एकल में दर्ज की ऐतिहासिक जीत
विश्व रैंकिंग में 211वें स्थान पर काबिज Divyanshi Bhowmick ने महिला एकल फाइनल में चीनी ताइपे की विश्व नंबर 38 Yeh Yi-Tian को रोमांचक मुकाबले में 3-2 (8-11, 11-8, 11-5, 7-11, 11-7) से हराया।
पहला गेम गंवाने के बाद दिव्यांशी ने शानदार वापसी की और अपने आत्मविश्वास, धैर्य तथा आक्रामक खेल के दम पर मुकाबला जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।
दुनिया की दूसरी सबसे युवा चैंपियन
दिव्यांशी की यह उपलब्धि केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व टेबल टेनिस के लिए भी खास मानी जा रही है। 15 वर्ष की आयु में वह WTT Feeder सर्किट में महिला एकल खिताब जीतने वाली दुनिया की दूसरी सबसे युवा खिलाड़ी बन गई हैं। उनसे पहले यह रिकॉर्ड जापान की स्टार खिलाड़ी Miwa Harimoto के नाम दर्ज है।
पूरे टूर्नामेंट के दौरान दिव्यांशी ने कई अनुभवी और ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ियों को हराकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
युगल वर्ग में भी जीता गोल्ड
दिव्यांशी ने महिला युगल वर्ग में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी सफलता को दोगुना कर दिया। उन्होंने साथी भारतीय खिलाड़ी Cinderella Das के साथ मिलकर जापान की साची आओकी और कोकोना मुरामात्सु की जोड़ी को फाइनल में 3-2 (7-11, 14-12, 12-14, 11-8, 11-7) से हराया।
कड़े मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने पहला गेम गंवाने के बावजूद शानदार वापसी की और निर्णायक क्षणों में बेहतरीन संयम का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।
भारतीय टेबल टेनिस का उज्ज्वल भविष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि दिव्यांशी भौमिक और सिंड्रेला दास जैसी युवा खिलाड़ियों की सफलता भारतीय टेबल टेनिस के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करती है। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में भारत को इन खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें रहेंगी।
दिव्यांशी की दोहरी स्वर्णिम सफलता ने भारतीय खेल जगत में नई ऊर्जा का संचार किया है और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
![]()

