प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाओं को ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या हो जाती है, जिसे Gestational Diabetes कहा जाता है। यह समस्या गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण होती है, जिससे शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता और ब्लड शुगर बढ़ जाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ज्यादातर मामलों में डिलीवरी के बाद जेस्टेशनल डायबिटीज ठीक हो जाता है। बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा निकलने पर हार्मोन लेवल सामान्य होने लगता है, जिससे ब्लड शुगर भी कंट्रोल में आ जाता है। लेकिन डॉक्टर सलाह देते हैं कि डिलीवरी के 6 से 12 सप्ताह बाद ब्लड शुगर टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
हालांकि, जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज होता है, उन्हें भविष्य में Type 2 Diabetes होने का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में ज्यादा होता है। इसलिए डिलीवरी के बाद भी खानपान, वजन और लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
जेस्टेशनल डायबिटीज होने का खतरा कब ज्यादा होता है:
अगर प्रेग्नेंसी से पहले वजन ज्यादा हो
परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री हो
फिजिकल एक्टिविटी कम हो
प्रेग्नेंसी में इंसुलिन लेना पड़ा हो
ज्यादा मीठा और हाई कैलोरी फूड का सेवन
डॉक्टरों के अनुसार सही डाइट, नियमित व्यायाम और समय-समय पर शुगर टेस्ट कराकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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