सोने की कीमतों में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मुनाफावसूली, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड इस गिरावट की प्रमुख वजहें हैं।
बुधवार को बहु-वस्तु विनिमय मंच (MCX) पर 24 कैरेट सोना करीब 1,47,489 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। एक ही कारोारी सत्र में सोने की कीमत में 3,500 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उस समय देखने को मिली है जब वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों पर टिकी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका में महंगाई दर उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना और टल सकती है। ऐसी स्थिति में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि हालिया तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि मई महीने में सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था। उस समय 24 कैरेट सोना 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। हालांकि अब कीमतें अपने हालिया उच्च स्तर से लगभग 9 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी हैं।
वस्तु एवं मुद्रा बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी से आई तेजी अस्थायी थी। अब बाजार दोबारा वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड आमतौर पर सोने की मांग को प्रभावित करती हैं, क्योंकि सोना किसी प्रकार का नियमित ब्याज या आय नहीं देता।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर सोने के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। जब तक कीमतें इस स्तर के ऊपर नहीं जातीं, तब तक बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है।
हालांकि कई विशेषज्ञ मौजूदा गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी मान रहे हैं। उनका सुझाव है कि निवेशक एकमुश्त निवेश करने की बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें। इससे बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है।
फिलहाल सोने के बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। यदि महंगाई नियंत्रित रहती है तो सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है। वहीं महंगाई बढ़ने की स्थिति में कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
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