स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों में तेज बुखार एक आम लक्षण हो सकता है। कई बार तापमान 103°F या उससे ऊपर भी पहुंच जाता है। तेज बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर जब इसके साथ तेज सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, बेहोशी, बहुत कमजोरी या शरीर में खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करना जरूरी है।
अगर बुखार 103°F तक पहुंच गया है और किसी वजह से तुरंत अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो सबसे पहले डिजिटल थर्मामीटर से तापमान दोबारा जांचें और समय नोट कर लें। व्यक्ति को आराम करने दें और बहुत ज्यादा कपड़े या कंबल न लपेटें। कमरे का तापमान सामान्य रखें और शरीर को अत्यधिक गर्म होने से बचाएं।
तेज बुखार में शरीर से पानी और तरल पदार्थ तेजी से कम हो सकते हैं। इसलिए मरीज को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी, ORS या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ देते रहें, बशर्ते वह होश में हो और निगलने में सक्षम हो। डेंगू जैसी बीमारी की आशंका हो तो भी पर्याप्त तरल लेना महत्वपूर्ण है। अगर लगातार उल्टी हो रही है और मरीज कुछ भी पी नहीं पा रहा है, तो यह अस्पताल जाने की जरूरत का संकेत हो सकता है।
बुखार कम करने के लिए दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें। आम तौर पर पैरासिटामोल का उपयोग बुखार और दर्द के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी सही मात्रा उम्र, वजन और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। बिना सलाह के बार-बार दवा लेना या एक साथ कई ऐसी दवाएं लेना जिनमें पैरासिटामोल मौजूद हो, नुकसान पहुंचा सकता है।
खास तौर पर अगर डेंगू की आशंका हो तो बिना डॉक्टर की सलाह के एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी दवाएं लेने से बचना चाहिए, क्योंकि डेंगू में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना भी सही नहीं है। बुखार का कारण वायरल, बैक्टीरियल या किसी अन्य संक्रमण से जुड़ा हो सकता है और सही इलाज के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
ठंडे पानी की बर्फ जैसी पट्टी या बहुत ठंडे पानी से शरीर को रगड़ने के बजाय सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से शरीर को आराम दिया जा सकता है। मरीज को बहुत ठंड लगने लगे, कांपने लगे या बेचैनी बढ़ जाए तो ऐसी कोशिश बंद कर दें। मुख्य उद्देश्य शरीर को आरामदायक तापमान पर रखना है, न कि अचानक तापमान गिराना।
103°F का बुखार अपने आप में हर व्यक्ति के लिए आपातकाल नहीं होता, लेकिन इसके पीछे का कारण महत्वपूर्ण है। अगर तेज बुखार के साथ सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, बेहोशी या भ्रम, दौरा, गर्दन अकड़ना, लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द, बहुत ज्यादा सुस्ती, पेशाब बहुत कम होना, त्वचा पर असामान्य खून के निशान या नाक-मसूड़ों से खून आना जैसे लक्षण हों, तो इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में तेज बुखार को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। घर पर किए गए उपाय केवल अस्थायी राहत के लिए हैं, बीमारी का इलाज नहीं। 103°F बुखार लंबे समय तक बना रहे या बार-बार लौटे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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