भारत की आर्थिक रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स में अपना निवेश कम किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि देश डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच India, China और Brazil जैसे ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश कम किया है। इस दौरान कुल मिलाकर करीब 183 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई है।
भारत के निवेश की बात करें तो एक साल में इसमें लगभग 21% की गिरावट आई है। अक्टूबर 2024 में जहां भारत के पास करीब 241 अरब डॉलर के अमेरिकी बॉन्ड्स थे, वहीं अक्टूबर 2025 तक यह घटकर करीब 190 अरब डॉलर रह गया।
वहीं दूसरी ओर, United States के बॉन्ड्स में विकसित देशों जैसे जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन का निवेश बढ़ा है, जो डॉलर को अभी भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए किया जा रहा है। भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक संतुलित और विविध बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि किसी एक मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सीधा भारी नुकसान हुआ है, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपनी वित्तीय रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं।
इसके अलावा, वैश्विक फॉरेक्स रिजर्व में भी डॉलर की हिस्सेदारी में धीरे-धीरे गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के तरीके बदल सकते हैं।
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