भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट यानी CETA अब 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। भारत में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने इसे दोनों देशों के इतिहास का सबसे तेज़ी से लागू होने वाला व्यापार समझौता बताया है।
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच हुई अहम बातचीत के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके 100 से 120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
एएनआई से बातचीत के दौरान ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक साल से भी कम समय में इसे लागू किया जा रहा है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक विकास का बड़ा अवसर साबित होगा।
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। ब्रिटेन भारत के 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को तत्काल ड्यूटी-फ्री एक्सेस देगा। इससे टेक्सटाइल, फुटवियर, लेदर, समुद्री उत्पाद और फार्मास्युटिकल सेक्टर को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा भारत में ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला आयात शुल्क भी 150 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे।
लिंडी कैमरन ने कहा कि टेक्सटाइल, फुटवियर, ऑटोमोबाइल और कई अन्य उद्योगों को इस समझौते से सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने इसे भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक पल बताया।
स्टील सेफगार्ड उपायों को लेकर उठे विवाद पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आपसी बातचीत के जरिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की है और समाधान निकालने का प्रयास किया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत सरकार कस्टम नोटिफिकेशन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कर रही है ताकि निर्यातक 15 जुलाई से ही इस समझौते का पूरा लाभ उठा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करेगा।
आने वाले वर्षों में यह व्यापार समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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