भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने बड़ा बयान दिया है। लंदन में आयोजित पहले Adani Green Electrification Dialogue के दौरान उन्होंने कहा कि अगले दो दशकों में भारत को लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करनी होगी। उनका कहना है कि देश की तेजी से बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश और दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है।
सागर अदाणी ने कहा कि भारत इस समय ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण और आर्थिक विकास के साथ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा उत्पादन को सस्ता, सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखना बेहद जरूरी होगा। उनके अनुसार अगले 20 वर्षों में लगभग 2,000 गीगावाट नई क्षमता जोड़ना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम कदम होगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भारत की कुल ऊर्जा खपत लगभग 10,000 टेरावॉट-आवर रही, जबकि चीन की ऊर्जा खपत इससे कई गुना अधिक थी। उनका मानना है कि जैसे-जैसे भारत में आय, औद्योगिक गतिविधियां और जीवन स्तर बढ़ेगा, बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। इसलिए देश को अभी से भविष्य की जरूरतों के अनुसार ऊर्जा अवसंरचना विकसित करनी होगी।
सागर अदाणी ने ऊर्जा परिवर्तन के लिए संतुलित रणनीति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सौर, पवन, जलविद्युत, आधुनिक तापीय बिजली और परमाणु ऊर्जा जैसे सभी विकल्पों का संतुलित उपयोग करना होगा। उनका मानना है कि मजबूत बेसलोड बिजली उत्पादन के बिना ऊर्जा प्रणाली को स्थिर और विश्वसनीय बनाए रखना संभव नहीं है।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा पिछले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों की भी सराहना की। उनके अनुसार नीतिगत बदलावों की वजह से निवेश, ट्रांसमिशन नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय से भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
अदाणी समूह की योजनाओं का जिक्र करते हुए सागर अदाणी ने बताया कि समूह वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है। इसके अलावा वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा पोर्टफोलियो तैयार करने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि समूह ऊर्जा भंडारण, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा जरूरतें इतनी व्यापक हैं कि उन्हें पूरा करने के लिए केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि सरकार, उद्योग जगत, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होगी। उनके अनुसार ऊर्जा सुरक्षा, किफायती बिजली और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक नीतियों, आधुनिक तकनीक और बड़े निवेश की जरूरत होगी।
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