अंतरराष्ट्रीय डेस्क। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम समझौता केवल प्रत्यक्ष संघर्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लेबनान सहित सभी मोर्चों पर लागू होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी क्षेत्र में युद्धविराम का उल्लंघन पूरे समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि युद्धविराम की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी मोर्चे पर सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो इसके परिणामों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार होंगे।
ईरान लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि किसी भी क्षेत्रीय समझौते में लेबनान को शामिल किया जाए और वहां ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियानों को रोका जाए। तेहरान का मानना है कि जब तक लेबनान में संघर्ष जारी रहेगा, तब तक किसी भी युद्धविराम को पूर्ण और प्रभावी नहीं माना जा सकता।
हालांकि, अमेरिका और इजरायल का रुख इससे अलग है। दोनों देशों का कहना है कि युद्धविराम मुख्य रूप से ईरान से जुड़े प्रत्यक्ष सैन्य टकरावों पर लागू होता है और लेबनान में चल रहे अभियानों को इसका हिस्सा नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं। पिछले कई सप्ताहों से इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच हमले और जवाबी हमले जारी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है।
मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा लगातार कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन लेबनान को लेकर बनी असहमति इन प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती बन गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की नई चेतावनी से चल रही वार्ताओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यदि दोनों पक्ष युद्धविराम की शर्तों को लेकर सहमति नहीं बना पाए, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है तथा व्यापक संघर्ष का खतरा भी पैदा हो सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अमेरिका, ईरान और इजरायल के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या फिर मध्य पूर्व एक नए संकट की ओर बढ़ता है।
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