मुंबई। भारतीय फिल्म संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका और पद्म भूषण से सम्मानित Suman Kalyanpur का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से संगीत प्रेमियों और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मुंबई में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया, जहां परिजनों, प्रशंसकों और कला जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुंबई में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
सुमन कल्याणपुर का अंतिम संस्कार मुंबई के सांताक्रूज स्थित पवन हंस श्मशान घाट में किया गया। महाराष्ट्र सरकार ने भारतीय संगीत में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में प्रशंसक और शुभचिंतक शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार, सुमन कल्याणपुर पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। उन्होंने 31 मई को अपने मुंबई स्थित आवास पर अंतिम सांस ली।
पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा कि सुमन कल्याणपुर की मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने भारतीय सांस्कृतिक जगत को समृद्ध किया। उनके गीत आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं।
प्रधानमंत्री ने शोक संदेश में उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कौन थीं सुमन कल्याणपुर?
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को हुआ था। उन्होंने अपने लंबे और सफल संगीत करियर में 800 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी मधुर गायकी ने हिंदी फिल्म संगीत में एक अलग पहचान बनाई।
उन्होंने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी, गुजराती, बंगाली, पंजाबी, भोजपुरी, असमिया, कन्नड़, मैथिली, राजस्थानी और ओड़िया सहित कई भारतीय भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए। उनकी आवाज की तुलना अक्सर महान गायिकाओं से की जाती थी और उन्होंने दशकों तक भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया।
भारतीय संगीत और कला के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें Padma Bhushan से सम्मानित किया था।
संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति
सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी सुरीली आवाज और सदाबहार गीत आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे। उनके जाने के साथ भारतीय फिल्म संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन उनकी यादें और गीत हमेशा अमर रहेंगे।
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