अगर आपका सपना देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU में पढ़ाई करने का है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
JNU देश की टॉप यूनिवर्सिटीज में शामिल है और अपने उच्च शैक्षणिक स्तर, रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए जाना जाता है। हर साल हजारों छात्र यहां ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और डॉक्टरेट कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन करते हैं।
JNU में अधिकांश कोर्सेज में एडमिशन कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET के स्कोर के आधार पर होता है। यह परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA आयोजित करती है।
अगर आप अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं, तो आपको CUET UG देना होगा। वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए CUET PG देना अनिवार्य है।
परीक्षा देने के बाद छात्रों को अलग से JNU की आधिकारिक एडमिशन प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है। इसके बाद CUET स्कोर के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है और उसी के अनुसार सीटें आवंटित की जाती हैं।
JNU को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी NIRF Ranking 2025 में दूसरा स्थान मिला था, जिससे इसकी लोकप्रियता और प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब बात करते हैं आरक्षण नीति की।
JNU में केंद्र सरकार की आरक्षण नीति लागू होती है। इसके तहत विभिन्न वर्गों के छात्रों के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं।
आरक्षण का प्रतिशत इस प्रकार है।
अनुसूचित जाति यानी SC के लिए 15 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं।
अनुसूचित जनजाति यानी ST के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।
अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC-NCL के लिए 27 प्रतिशत सीटें निर्धारित हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं।
वहीं दिव्यांग यानी PwD उम्मीदवारों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
इसके अलावा कुछ अतिरिक्त नियम भी लागू होते हैं।
OBC-NCL वर्ग के उम्मीदवारों को क्वालिफाइंग परीक्षा में 10 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है।
SC, ST और PwD वर्ग के छात्र न्यूनतम योग्यता अंकों के साथ भी प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि MTech और MBA जैसे कुछ कोर्सों के लिए अलग पात्रता मानदंड लागू होते हैं।
JNU में विदेशी छात्रों को भी प्रवेश दिया जाता है, जिससे विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय विविधता बनी रहती है।
छात्रों को हॉस्टल सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन यह सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि कोई भी छात्र एक समय में केवल एक फुल टाइम कोर्स में ही प्रवेश ले सकता है।
हालांकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत ओपन और डिस्टेंस लर्निंग को अनुमति दी गई है।
अब बात करते हैं दस्तावेजों की।
अगर कोई छात्र आरक्षण का लाभ लेना चाहता है, तो उसके पास वैध और अपडेटेड प्रमाण पत्र होना जरूरी है।
अगर आवेदन के समय प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो उसकी रसीद जमा की जा सकती है, लेकिन अंतिम एडमिशन से पहले मूल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
साथ ही, अगर कोई आरक्षित वर्ग का छात्र सामान्य मेरिट के आधार पर चयनित होता है, तो उसे आरक्षण श्रेणी में नहीं गिना जाएगा।
अगर आप JNU में एडमिशन का सपना देख रहे हैं, तो समय रहते CUET की तैयारी शुरू करें और सभी दस्तावेज पहले से तैयार रखें।
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