मौसम बदलते ही क्या आपके घुटनों, कंधों या कमर में दर्द और अकड़न बढ़ने लगती है? क्या सुबह उठते समय जोड़ों को हिलाने में परेशानी होती है या लंबे समय तक बैठने के बाद खड़े होने पर दर्द महसूस होता है? अगर ऐसा है, तो इसे केवल उम्र बढ़ने का असर समझकर नजरअंदाज न करें। मौसम में बदलाव के दौरान कई लोगों को जोड़ों का दर्द पहले से ज्यादा महसूस होने लगता है। खासतौर पर ठंड बढ़ने या हवा में नमी होने पर घुटनों और कंधों की परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड या नमी सीधे तौर पर गठिया का कारण नहीं बनती, लेकिन पहले से मौजूद जोड़ों की समस्याओं के लक्षणों को बढ़ा सकती है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सर्वोदय अस्पताल के हड्डी रोग एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर और प्रमुख डॉ. अंकुर सिंह ने इस विषय पर अपनी राय साझा की। उनके मुताबिक, मौसम में बदलाव के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव, शारीरिक गतिविधियों में कमी और रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव जोड़ों की परेशानी को प्रभावित कर सकते हैं। जिन लोगों को पहले से घुटनों में घिसाव, गठिया या जोड़ों से संबंधित दूसरी समस्याएं हैं, उन्हें मौसम बदलने पर दर्द और अकड़न ज्यादा महसूस हो सकती है।
सवाल है कि आखिर मौसम बदलने पर जोड़ों में अकड़न क्यों बढ़ जाती है? दरअसल, ठंड के मौसम में बहुत से लोग शारीरिक गतिविधियां कम कर देते हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने या कम चलने-फिरने से मांसपेशियों और जोड़ों के आसपास के ऊतकों में जकड़न महसूस हो सकती है। इससे जोड़ों को हिलाने-डुलाने में परेशानी हो सकती है। खासकर सुबह उठने के बाद, लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने के बाद या सीढ़ियां चढ़ते समय यह परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है।
इसके अलावा, कुछ लोगों को तापमान और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव के दौरान दर्द की संवेदनशीलता बढ़ने का अनुभव होता है। हालांकि, मौसम का जोड़ों के दर्द पर कितना असर पड़ता है, यह हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोगों को ठंड या नमी में दर्द अधिक महसूस होता है, जबकि कुछ लोगों को मौसम बदलने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि मौसम बदलने पर होने वाला हर दर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत है। लेकिन अगर दर्द बार-बार हो रहा है या पहले से मौजूद समस्या बढ़ रही है, तो इसकी वजह जानना जरूरी है।
जोड़ों के दर्द से बचाव के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि बेहद महत्वपूर्ण है। मौसम ठंडा होने पर भी अपनी क्षमता के अनुसार हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग और जोड़ों को धीरे-धीरे हिलाने वाले व्यायाम किए जा सकते हैं। नियमित गतिविधि से मांसपेशियों की मजबूती और जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अगर व्यायाम करते समय तेज दर्द हो, तो जबरदस्ती गतिविधि जारी न रखें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से अपने लिए उपयुक्त व्यायाम चुनें।
ठंड के दौरान शरीर को गर्म रखना भी आराम देने में मदद कर सकता है। घुटनों और कंधों को गर्म कपड़ों से ढककर रखें और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचें। बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें और शरीर को हल्का सक्रिय रखें। कुछ लोगों को गर्म सिकाई से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन सूजन या किसी चोट की स्थिति में सिकाई करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। सिकाई करते समय बहुत ज्यादा गर्म पानी या हीटिंग पैड का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे त्वचा जल सकती है।
खानपान का ध्यान रखना भी जरूरी है। संतुलित आहार में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी के पर्याप्त स्रोत शामिल करें। दूध, दही, दालें, हरी सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शरीर की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। विटामिन डी की कमी या हड्डियों से जुड़ी किसी समस्या का संदेह होने पर डॉक्टर से सलाह लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द कम करने वाली दवाओं या सप्लीमेंट का नियमित सेवन करने से बचें। यदि वजन अधिक है, तो सुरक्षित तरीके से वजन नियंत्रित करने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
यह समझना भी जरूरी है कि हर तरह का जोड़ों का दर्द केवल मौसम की वजह से नहीं होता। घुटनों में घिसाव, गठिया, मांसपेशियों में खिंचाव, चोट और अन्य चिकित्सकीय समस्याएं भी दर्द की वजह हो सकती हैं। यदि जोड़ों में लगातार दर्द बना रहे, बार-बार सूजन आए, चलने-फिरने में परेशानी हो या दर्द रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर से जांच कराएं। अगर किसी जोड़ में अचानक तेज दर्द, अधिक सूजन, लालिमा या गर्माहट के साथ बुखार हो, तो जल्द चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
कुल मिलाकर, मौसम बदलने पर जोड़ों का दर्द और अकड़न बढ़ना कुछ लोगों में आम हो सकता है, लेकिन इसे हमेशा सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। नियमित हल्का व्यायाम, संतुलित खानपान, शरीर को गर्म रखना और लंबे समय तक निष्क्रिय न रहना परेशानी कम करने में मदद कर सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर दर्द लगातार बना रहता है या उसकी तीव्रता बढ़ती जा रही है, तो सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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