देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने गुजरात और हरियाणा स्थित संयंत्रों में बने रेलवे टर्मिनलों के जरिए 10 लाख से ज्यादा वाहनों की ढुलाई पूरी कर ली है। खास बात यह है कि इस मुकाम तक पहुंचने में कंपनी को तीन साल से कुछ अधिक समय लगा। आखिर कैसे रेलवे के जरिए गाड़ियों की ढुलाई कंपनी के लिए अहम साबित हो रही है? और आने वाले वर्षों के लिए क्या है इसका लक्ष्य? आइए जानते हैं पूरी जानकारी।
मारुति सुजुकी इंडिया ने शुक्रवार को बताया कि गुजरात के हंसलपुर और हरियाणा के मानेसर स्थित संयंत्रों में बने रेलवे साइडिंग के माध्यम से अब तक 10 लाख से अधिक वाहनों को भेजा जा चुका है।
कंपनी के मुताबिक, हंसलपुर संयंत्र में रेलवे साइडिंग से परिचालन मार्च 2023 में शुरू हुआ था, जबकि मानेसर में यह सुविधा जून 2025 में शुरू की गई। इन दोनों सुविधाओं के जरिए कंपनी ने वाहन परिवहन में रेल की भूमिका को बढ़ाया है।
अब बात करते हैं कि इन रेलवे साइडिंग की खासियत क्या है। आम तौर पर वाहनों को संयंत्र से रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए ट्रकों की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन संयंत्र के भीतर ही रेलवे टर्मिनल होने से वाहनों को सीधे वहीं मालगाड़ियों में लोड किया जा सकता है। इससे नजदीकी रेलवे स्टेशन तक गाड़ियों को ट्रकों से ले जाने की आवश्यकता खत्म हो जाती है।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 10 लाख वाहनों में से करीब 7 लाख 90 हजार वाहन गुजरात स्थित रेलवे साइडिंग के जरिए भेजे गए हैं। वहीं, हरियाणा के मानेसर रेलवे टर्मिनल से लगभग 2 लाख 10 हजार वाहनों का परिवहन किया गया है।
चालू वित्त वर्ष में भी रेल आधारित ढुलाई के आंकड़े सामने आए हैं। कंपनी ने बताया कि 31 अगस्त तक उसकी रेल के जरिए वाहन ढुलाई तीन लाख इकाइयों के आंकड़े को पार कर चुकी थी। इसी वित्त वर्ष में रेल आधारित कुल वाहन ढुलाई का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों संयंत्रों की रेलवे साइडिंग के माध्यम से किया गया है।
अब कंपनी का अगला लक्ष्य भी जान लीजिए। मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2030-31 तक अपनी कुल वाहन ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। यानी कंपनी आने वाले वर्षों में रेल परिवहन के इस्तेमाल को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने इस उपलब्धि को कंपनी की हरित लॉजिस्टिक्स यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित ये रेलवे साइडिंग एकीकृत मल्टी-मॉडल बुनियादी ढांचे का उदाहरण हैं, जो परिचालन दक्षता और पर्यावरणीय लाभ दोनों उपलब्ध करा सकते हैं।
कंपनी का कहना है कि सड़क से रेल परिवहन की ओर वाहनों की ढुलाई स्थानांतरित करने से ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, सड़कों पर वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ घटाने में भी रेल आधारित परिवहन की भूमिका हो सकती है।
मारुति सुजुकी के अनुसार, वह अपने विनिर्माण संयंत्रों में रेलवे साइडिंग स्थापित करने वाली भारत की पहली और एकमात्र यात्री वाहन निर्माता कंपनी है।
फिलहाल कंपनी ने 10 लाख वाहनों की ढुलाई का आंकड़ा पार कर लिया है। अब देखना होगा कि 2030-31 तक रेल परिवहन की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी किस तरह अपनी सुविधाओं का विस्तार करती है।
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