भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अनिवार्य नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं करने पर 10 पंजीकृत शोध विश्लेषकों (Research Analysts) का पंजीकरण रद्द कर दिया है। नियामक ने यह कार्रवाई SEBI (Intermediaries) Regulations, 2008 के तहत की है। इसके अलावा, एक अलग आदेश में फर्स्टकैपिटल अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का पंजीकरण भी समय पर त्रैमासिक गतिविधि रिपोर्ट (Quarterly Activity Report) दाखिल नहीं करने के कारण रद्द कर दिया गया।
नवीनीकरण शुल्क नहीं जमा करने पर कार्रवाई
सेबी के अनुसार, सभी पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट्स को हर पांच वर्ष में अपना पंजीकरण नवीनीकृत कराने के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है। जांच में पाया गया कि संबंधित 10 संस्थाओं और व्यक्तियों ने जुलाई 2020 से दिसंबर 2025 के बीच देय नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं किया।
इसके बाद सेबी ने फरवरी 2025 और मई 2026 में संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किए और जवाब मांगा। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी भी इकाई ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके चलते नियामक ने उनका पंजीकरण रद्द करने का निर्णय लिया।
इन संस्थाओं और व्यक्तियों पर हुई कार्रवाई
सेबी के आदेश के अनुसार जिन प्रमुख इकाइयों और व्यक्तियों का पंजीकरण रद्द किया गया है, उनमें शामिल हैं—
इम्तियाज रहमान मर्चेंट
प्रवीण पाथियिल
इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
एफ्लूएंस फिनकॉन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड
प्रिया क्लाइड एंड्रेड्स
प्रफुल बोहरा
इसके अलावा अन्य संबंधित पंजीकृत शोध विश्लेषकों पर भी कार्रवाई की गई है, जिससे कुल संख्या 10 हो गई है।
SEBI ने क्या कहा?
नियामक ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कदम समाप्त हो चुके पंजीकरण के संभावित दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि पंजीकरण रद्द होने के बावजूद संबंधित संस्थाएं और व्यक्ति अपने पंजीकरण अवधि के दौरान किए गए कार्यों या किसी भी चूक के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार रहेंगे।
AIF का पंजीकरण भी हुआ रद्द
सेबी ने एक अलग आदेश में फर्स्टकैपिटल अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट, जो एक पंजीकृत Alternative Investment Fund (AIF) है, का पंजीकरण भी समाप्त कर दिया।
नियामक के अनुसार, ट्रस्ट ने वर्ष 2025 की मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर तिमाहियों की अनिवार्य गतिविधि रिपोर्ट समय पर जमा नहीं की।
क्या हैं नियम?
SEBI के नियमों के अनुसार प्रत्येक पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) को हर तिमाही समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट नियामक के पास जमा करनी होती है। समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर नियामक कार्रवाई कर सकता है।
निष्कर्ष
SEBI की यह कार्रवाई वित्तीय बाजार में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नियामक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पंजीकरण नवीनीकरण और समय पर रिपोर्टिंग जैसे नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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