Wednesday, June 10, 2026
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सुरक्षा हटाने पर भड़के तेजस्वी यादव, बोले- लालू-राबड़ी का अपमान नहीं सहेगा RJD

बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार की सुरक्षा कम किए जाने को लेकर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राजद किसी से डरने वाली पार्टी नहीं है और जनता हमेशा उनके साथ खड़ी है।

मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि “डरपोक लोग ही सुरक्षा के सहारे खड़े रहते हैं। हम किसी से नहीं डरते। हमारे कार्यकर्ता साहसी हैं और जनता का समर्थन हमारे साथ है।” उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी सोच में कोई बदलाव नहीं आया है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि “सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली और सोच में परिपक्वता दिखाई नहीं देती।” उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास 10, सर्कुलर रोड को भाजपा नेता और मंत्री नंद किशोर यादव को आवंटित किए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद राबड़ी देवी के आवास पर आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया।

इसी बीच सरकार द्वारा लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और उनके परिवार की सुरक्षा में कटौती किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। आरजेडी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह विपक्षी नेताओं को अपमानित करने और दबाव में लाने की कोशिश है।

आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार उनके शीर्ष नेताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा कम करना राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम है। पार्टी नेताओं का दावा है कि यदि सरकार सुरक्षा नहीं देगी तो आरजेडी कार्यकर्ता स्वयं अपने नेताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे।

राबड़ी देवी के आवास के बाहर कई आरजेडी नेता और कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा बनाकर खड़े दिखाई दिए। पार्टी नेताओं ने इसे अपने नेताओं के प्रति समर्थन और एकजुटता का प्रतीक बताया।

इस मुद्दे ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। एक ओर आरजेडी सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगा रही है, वहीं सत्ता पक्ष अब तक इस मामले में अपने फैसले को प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।

आगामी दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि बिहार में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनना शुरू हो चुका है और ऐसे मुद्दे राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं।

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