राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नगर निगम के इतिहास और विरासत को सहेजने की बड़ी योजना में अहम बदलाव देखने को मिला है। दिल्ली नगर निगम (MCD) का प्रस्तावित संग्रहालय अब ऐतिहासिक टाउन हॉल में नहीं बनाया जाएगा। इसके बजाय निगम अब नए स्थान की तलाश में जुट गया है और संभावना जताई जा रही है कि यह संग्रहालय जल्द ही लाहौरी गेट स्थित ऐतिहासिक हवेली में बनाया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक यह फैसला दिल्ली सरकार द्वारा टाउन हॉल परिसर के अधिग्रहण के बाद लिया गया है। दिल्ली सरकार का पर्यटन विभाग अब टाउन हॉल को एक बड़े ग्लोबल हेरिटेज और टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है। इस परियोजना को केंद्र सरकार की “नेशनल मिशन फॉर डेवलपिंग फिफ्टी ग्लोबली कम्पेटिटिव टूरिज्म डेस्टिनेशन” योजना के तहत तैयार किया जाएगा।
Municipal Corporation of Delhi के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार पहले टाउन हॉल परिसर के प्रेस भवन को संग्रहालय के लिए चिन्हित किया गया था। इसके लिए Aga Khan Foundation की मदद से भवन का सर्वे भी कराया गया था। वहीं Indira Gandhi National Centre for the Arts यानी आईजीएनसीए को एमसीडी के इतिहास, दस्तावेजों के संरक्षण और संग्रहालय की दीर्घाओं के डिजाइन की जिम्मेदारी दी गई थी।
लेकिन अब चूंकि टाउन हॉल को दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग को सौंपा जा रहा है, इसलिए निगम ने वैकल्पिक स्थान के रूप में लाहौरी गेट स्थित हवेली को चुना है। इस हवेली का हाल ही में भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत राष्ट्रीय न्यास यानी INTACH की मदद से जीर्णोद्धार किया गया है।
सूत्रों के अनुसार एमसीडी और आईजीएनसीए के बीच लाहौरी गेट हवेली संग्रहालय को लेकर समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस प्रस्तावित संग्रहालय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विशेष स्थान, कैफे, कला दीर्घाएं और दिल्ली नगर प्रशासन के इतिहास को दर्शाने वाले अनुभाग बनाए जाएंगे। शुरुआती वर्षों में संग्रहालय के संचालन का खर्च आईजीएनसीए उठाएगा, जबकि बाद में इसे राजस्व साझेदारी मॉडल पर चलाने की योजना है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने अपने बजट 2026 में टाउन हॉल परिसर को ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। चांदनी चौक स्थित यह ऐतिहासिक इमारत विदेशी पर्यटकों के बीच पहले से ही आकर्षण का केंद्र रही है। ऐसे में सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है।
गौरतलब है कि लगभग 160 वर्ष पुराना टाउन हॉल वर्ष 1866 से 2012 तक एमसीडी का मुख्यालय रहा। इस भवन का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1860 से 1863 के बीच कराया गया था। शुरुआत में इसे “लॉरेंस इंस्टीट्यूट” के रूप में विकसित किया गया था, जहां यूरोपीय सैनिकों और नागरिकों के सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते थे। बाद में इसे प्रशासनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।
1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली में नगर प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए 1866 में दिल्ली म्युनिसिपल कमेटी का गठन किया और टाउन हॉल को उसका मुख्यालय बनाया गया। लगभग 146 वर्षों तक यह भवन दिल्ली नगर प्रशासन का प्रमुख केंद्र बना रहा।
ब्रिटिश वास्तुकला शैली में बनी यह इमारत लाल और पीले पत्थरों, ऊंचे बरामदों, मेहराबदार गलियारों और विशाल सभा कक्षों के लिए प्रसिद्ध है। अब इसे एक आधुनिक हेरिटेज सेंटर में बदलने की तैयारी चल रही है।
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