महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। तिसगांव इलाके में खवड्या पहाड़ के पास करीब 18 साल का एक युवक पहाड़ पर पहुंच गया था। उसके सामने गहरी खाई थी और नीचे उसका परिवार, गांव के लोग और बाद में पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम उसे सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश कर रही थी।
घटना की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे हुई। परिवार को जानकारी मिली कि युवक पहाड़ पर पहुंच गया है और खाई के बेहद करीब खड़ा है। इसके बाद परिवार के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। मां ने अपने बेटे को समझाने की कोशिश शुरू की। वह लगातार उसे नीचे आने के लिए कहती रही, लेकिन युवक वहां से हटने के लिए तैयार नहीं था।
मां की आंखों के सामने उसका बेटा खाई के किनारे खड़ा था। वह उसे बार-बार समझाती रही और नीचे आने की अपील करती रही। परिवार के बाकी लोग भी उसे मनाने में जुटे थे। आसपास के गांव के लोग और सरपंच भी मौके पर पहुंच गए और युवक से बातचीत कर उसे सुरक्षित नीचे लाने की कोशिश करने लगे।
हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई। कुछ ही देर में बचाव दल मौके पर पहुंच गया। इसके बाद युवक को सुरक्षित तरीके से नीचे उतारने की कोशिश शुरू हुई। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने भी उससे बातचीत कर उसे समझाने का प्रयास किया।
करीब तीन घंटे तक यह सिलसिला चलता रहा। एक तरफ मां अपने बेटे को बचाने के लिए लगातार गुहार लगा रही थी, तो दूसरी तरफ गांव के लोग और बचाव दल उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे। हर किसी को उम्मीद थी कि युवक मान जाएगा और सुरक्षित नीचे आ जाएगा।
लेकिन दोपहर करीब 1 बजे अचानक स्थिति बेहद गंभीर हो गई। तीन घंटे की कोशिशों के बावजूद युवक को नीचे नहीं लाया जा सका। इसके बाद जो घटना हुई, उसने मौके पर मौजूद लोगों को हिलाकर रख दिया और परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।
इस घटना की पूरी परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। युवक आखिर पहाड़ पर क्यों पहुंचा था, उसके मन में क्या चल रहा था और परिवार को ऐसी स्थिति का सामना क्यों करना पड़ा, इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आ सकते हैं।
घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि मानसिक और भावनात्मक संकट की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है। जब कोई व्यक्ति खुद को बेहद मुश्किल परिस्थिति में महसूस कर रहा हो, तो परिवार और आसपास के लोगों की तत्काल मदद बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, खुद को अलग करना, निराशा की बातें करना या असामान्य तरीके से प्रतिक्रिया देना नजर आए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उसके साथ शांत तरीके से बात करना और जरूरत पड़ने पर तुरंत परिवार, स्थानीय प्रशासन या विशेषज्ञों की मदद लेना जरूरी है।
इस मामले में परिवार ने भी अपने स्तर पर युवक को समझाने की पूरी कोशिश की। मां लगातार उसके सामने खड़ी रही और उसे नीचे आने के लिए मनाती रही। गांव के लोगों ने भी परिवार का साथ दिया। पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। लेकिन कई घंटों की कोशिश के बाद भी स्थिति को संभाला नहीं जा सका।
फिलहाल इस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवक वहां तक कैसे पहुंचा और घटना से पहले उसके साथ क्या परिस्थितियां बनी थीं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
यह घटना परिवार के लिए ऐसा सदमा है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। सुबह जिस परिवार ने अपने बेटे को बचाने के लिए पहाड़ का रुख किया था, कुछ घंटे बाद वही परिवार एक बेहद दर्दनाक त्रासदी से गुजर रहा था।
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