भारत के Steel Sector को लेकर केंद्र सरकार जल्द ही एक नई National Steel Policy को सार्वजनिक चर्चा के लिए सामने लाने जा रही है। इस नई नीति का लक्ष्य सिर्फ देश में Steel Production बढ़ाना नहीं है, बल्कि घरेलू उद्योग को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना, Green Steel को बढ़ावा देना और आने वाले दशकों के लिए Raw Material Security तैयार करना भी है। Steel Secretary Sandeep Poundrik के मुताबिक, सरकार 2047 तक देश की Steelmaking Capacity को 600 Million Metric Tonnes तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल—आखिर नई Steel Policy में ऐसा क्या खास होने वाला है? रिपोर्ट किए गए Draft के मुताबिक, सरकार का फोकस सस्ते और कम गुणवत्ता वाले विदेशी Steel Imports से घरेलू उद्योग को बचाने पर भी रहेगा। जरूरत पड़ने पर Safeguard Duty और Anti-Dumping Duty जैसे व्यापारिक उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इन उपायों का वास्तविक स्वरूप और अंतिम प्रावधान सार्वजनिक चर्चा के बाद सामने आने वाली नीति में स्पष्ट होंगे।
भारत में Steel की मांग Infrastructure, Construction, Railway, Automobile और Manufacturing जैसे क्षेत्रों के विस्तार के साथ लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे Steel Products को बढ़ावा देना है जिनमें ज्यादा Value Addition हो। इसका मतलब सिर्फ ज्यादा Steel बनाना नहीं, बल्कि Specialty Steel, High-Grade Steel और दूसरे बेहतर उत्पादों की घरेलू क्षमता को मजबूत करना भी है।
नई नीति में छोटे और मध्यम Steel Producers को लेकर भी खास ध्यान दिए जाने की बात सामने आई है। छोटे उत्पादकों के लिए नई Technology अपनाना और Production Process को ज्यादा Efficient बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सरकार तकनीकी सहायता और Decarbonisation की दिशा में Handholding जैसी व्यवस्था पर जोर दे सकती है। इससे छोटे उद्योगों को बदलती Environmental और Global Trade Requirements के साथ तालमेल बैठाने में मदद मिल सकती है।
लेकिन इस पूरी नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है Green Steel। Steel Industry एक Energy-Intensive Sector है और इससे Carbon Emissions भी काफी मात्रा में जुड़े हैं। रिपोर्ट किए गए Draft के अनुसार, सरकार 2047 तक Crude Steel के प्रति टन उत्पादन पर औसत Carbon Emission Intensity को मौजूदा करीब 2.54 टन से घटाकर लगभग 1.54 टन करने की दिशा में काम करना चाहती है। यह लक्ष्य भारत के 2070 तक Net-Zero Emissions के व्यापक लक्ष्य से भी जुड़ा हुआ है।
Raw Material Security भी नई नीति का बड़ा हिस्सा है। अनुमान है कि 2047 तक भारत की Iron Ore जरूरत करीब 772 Million Tonnes तक पहुंच सकती है। वहीं Coking Coal की मांग करीब 214 Million Tonnes तक पहुंचने का अनुमान है। इसी वजह से सरकार विदेशों में Mining Assets हासिल करने और दूसरे देशों के साथ Joint Ventures के जरिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करने के विकल्पों पर काम कर रही है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की मौजूदा National Steel Policy साल 2017 में बनाई गई थी। उस नीति में 2030-31 तक 300 Million Tonnes Crude Steel Capacity का लक्ष्य रखा गया था। अब बदलती Global Economy, बढ़ती Domestic Demand, Climate Commitments और International Trade Barriers को देखते हुए अगले लंबे दौर के लिए नई रणनीति तैयार की जा रही है।
नई नीति में Import Substitution के साथ-साथ Quality को भी महत्व दिया जाएगा। भारत पहले से ही Steel Quality Control Order के जरिए घटिया या मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले Steel Products पर नियंत्रण की व्यवस्था लागू कर चुका है। इसका उद्देश्य Domestic और Imported दोनों तरह के Steel Products में निर्धारित Quality Standards सुनिश्चित करना है।
अगर यह प्रस्तावित रोडमैप लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत का Steel Sector सिर्फ उत्पादन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि Technology, Green Manufacturing, Specialty Steel और Raw Material Security के मामले में भी बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है। हालांकि अंतिम नीति अभी सार्वजनिक चर्चा और सुझावों की प्रक्रिया से गुजरनी है, इसलिए Draft में मौजूद प्रावधानों में बदलाव संभव है।
फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य 2047 तक 600 Million Tonnes की Steelmaking Capacity है। इसके साथ Green Steel, घरेलू उत्पादन, सस्ते आयात से सुरक्षा, छोटे उत्पादकों को तकनीकी सहयोग और Iron Ore तथा Coking Coal की दीर्घकालिक उपलब्धता पर फोकस दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में जब National Steel Policy का Draft सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी होगा, तब उद्योग और आम लोग इस पर अपने सुझाव दे सकेंगे।
![]()

