अनियमित पीरियड्स, पेट में दर्द, पीरियड्स के दौरान ज्यादा परेशानी और गर्भधारण में दिक्कत जैसी समस्याएं कई महिलाओं के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं। तनाव, नींद की कमी, खानपान और जीवनशैली के अलावा कई चिकित्सीय कारण भी इन समस्याओं के पीछे हो सकते हैं। ऐसे में आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली शतावरी का नाम अक्सर सामने आता है। इसे महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए पारंपरिक रूप से उपयोगी माना जाता है, लेकिन इसे किसी बीमारी का पक्का इलाज समझना सही नहीं है।
शतावरी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका पारंपरिक रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े अलग-अलग उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। सोशल मीडिया और स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं में इसे हार्मोन संतुलन, पीरियड्स और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बताया जाता है। हालांकि, इन दावों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं और हर महिला पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।
अनियमित पीरियड्स की बात करें तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। हार्मोनल असंतुलन, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, थायराइड की समस्या, वजन में बदलाव, अत्यधिक तनाव या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां इसके कारण हो सकती हैं। इसलिए सिर्फ शतावरी का पानी पीने से पीरियड्स नियमित हो जाएंगे, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता।
शतावरी को लेकर यह भी कहा जाता है कि इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकते हैं। लेकिन अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, कई महीनों से समस्या बनी हुई है या अचानक पीरियड्स में बड़ा बदलाव आया है, तो सबसे पहले इसके कारण की जांच करवाना जरूरी है।
पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन और दर्द के लिए भी शतावरी को पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कुछ ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जिनमें संभावित एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों पर अध्ययन हुआ है। हालांकि, तेज पीरियड दर्द को केवल घरेलू उपाय से मैनेज करने के बजाय जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
इसी तरह हैवी ब्लीडिंग को कम करने का दावा भी शतावरी से जुड़ा हुआ है, लेकिन ज्यादा रक्तस्राव को सामान्य मानकर केवल शतावरी का पानी पीना उचित नहीं है। अगर हर महीने बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, बड़े रक्त के थक्के आते हैं, कमजोरी या चक्कर महसूस होते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
अब बात करते हैं फर्टिलिटी की। शतावरी को आयुर्वेद में प्रजनन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है और कुछ शोधों में इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन भी किया गया है। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि शतावरी ओव्यूलेशन को निश्चित रूप से बेहतर करती है या इससे गर्भधारण की संभावना तय तौर पर बढ़ जाती है।
गर्भधारण में परेशानी के पीछे महिलाओं में ओव्यूलेशन की समस्या, हार्मोनल बदलाव, फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी समस्या और कई अन्य कारण हो सकते हैं। वहीं पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी गर्भधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए लंबे समय से गर्भधारण न होने की स्थिति में सिर्फ किसी एक जड़ी-बूटी पर निर्भर रहने के बजाय दोनों पार्टनर्स की उचित जांच जरूरी हो सकती है।
शतावरी को तनाव और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी बताया जाता है। तनाव कम करने और पर्याप्त नींद लेने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, लेकिन इसे फर्टिलिटी की दवा नहीं माना जाना चाहिए। इसी तरह शतावरी को एग क्वालिटी या गर्भाशय की सेहत सुधारने का निश्चित समाधान बताने के लिए पर्याप्त मजबूत प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
अगर कोई महिला शतावरी का पानी लेना चाहती है तो सोशल मीडिया पर बताए गए किसी भी नुस्खे को बिना सोचे-समझे अपनाने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासकर अगर आप पहले से कोई दवा ले रही हैं, गर्भवती हैं, गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही हैं।
घरेलू तरीके से बनाए जाने वाले शतावरी पानी को लेकर आम तौर पर शतावरी की जड़ या उपलब्ध उत्पाद की निर्धारित मात्रा पानी में उबालकर लेने की बात कही जाती है। लेकिन इसकी मात्रा हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होनी चाहिए। जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता और उनमें मौजूद सक्रिय तत्व भी अलग-अलग हो सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि अनियमित पीरियड्स या इनफर्टिलिटी को नजरअंदाज न करें। शतावरी जैसी जड़ी-बूटी को संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ एक संभावित पारंपरिक विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन इसे डॉक्टर की जांच या जरूरी उपचार का विकल्प नहीं बनाना चाहिए।
अगर पीरियड्स लंबे समय तक अनियमित हैं, अचानक बंद हो गए हैं, अत्यधिक दर्द या ब्लीडिंग हो रही है या गर्भधारण में लगातार परेशानी आ रही है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सही कदम है। सही कारण पता चलने के बाद ही उचित उपचार तय किया जा सकता है।
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