Wednesday, June 10, 2026
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यूपी बिजली कर्मियों में बढ़ता असंतोष: 2022 और 2023 के समझौतों के क्रियान्वयन में देरी पर संघर्ष समिति का बड़ा आरोप

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों में लंबे समय से लंबित मांगों और अधूरे समझौतों को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि बिजली कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए वर्ष 2022 और 2023 में हुए महत्वपूर्ण समझौतों का अब तक पूर्ण क्रियान्वयन नहीं किया गया है। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान और उसके बाद कर्मचारियों के खिलाफ की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई भी वापस नहीं ली गई है, जिससे प्रदेशभर के बिजली कर्मचारियों में नाराजगी और निराशा का माहौल है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर औद्योगिक सौहार्द और बिजली क्षेत्र के कार्य वातावरण पर पड़ सकता है। उन्होंने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से समझौतों के सभी बिंदुओं को तत्काल लागू करने की मांग की है।

3 दिसंबर 2022 का समझौता आज भी अधूरा

संघर्ष समिति के अनुसार, 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और संघर्ष समिति के बीच एक महत्वपूर्ण लिखित समझौता हुआ था। यह बैठक मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।

समिति का आरोप है कि इस समझौते में शामिल अधिकांश बिंदुओं पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उनकी सेवा संबंधी समस्याओं, कार्य परिस्थितियों और अन्य लंबित मुद्दों का समाधान होगा, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने से असंतोष बढ़ता गया।

समझौते लागू न होने पर मार्च 2023 में हुआ आंदोलन

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है कि दिसंबर 2022 के समझौते को लागू करने में लगातार हो रही देरी के कारण कर्मचारियों को मार्च 2023 में सांकेतिक आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

समिति का आरोप है कि कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने के बजाय आंदोलन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। इससे कर्मचारियों में आक्रोश और अधिक बढ़ गया।

19 मार्च 2023 के समझौते के निर्देश भी अधूरे

संघर्ष समिति ने बताया कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ एक और महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस दौरान ऊर्जा मंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष को निर्देश दिए थे कि आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस ली जाए, कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर समाप्त की जाएं और सेवा से हटाए गए संविदा कर्मचारियों को पुनः बहाल किया जाए।

हालांकि संघर्ष समिति का दावा है कि इन निर्देशों का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। समिति का कहना है कि समझौतों और निर्देशों को लागू न करने से कर्मचारियों का विश्वास प्रभावित हुआ है।

बिजली कर्मचारियों में गहराता असंतोष

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि दिसंबर 2022 और मार्च 2023 के समझौतों के अधूरे क्रियान्वयन ने पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों में असंतोष को बढ़ा दिया है। कर्मचारियों को लग रहा है कि उनकी समस्याओं और मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

समिति ने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो कर्मचारियों के बीच असंतोष का बढ़ना स्वाभाविक है।

भीषण गर्मी में भी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे कर्मचारी

संघर्ष समिति ने कहा कि तमाम समस्याओं और विवादों के बावजूद बिजली कर्मचारी प्रदेश की जनता को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं।

समिति के अनुसार, भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली कर्मी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री के नेतृत्व और सरकार की जनहितकारी नीतियों पर विश्वास रखते हैं।

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि—

  • मार्च 2023 के आंदोलन से जुड़ी सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई तत्काल प्रभाव से वापस ली जाए।
  • कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर समाप्त की जाएं।
  • सेवा से हटाए गए संविदा कर्मचारियों को पुनः बहाल किया जाए।
  • 3 दिसंबर 2022 और 19 मार्च 2023 के समझौतों के सभी बिंदुओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
  • बिजली कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की जाए।

बेहतर बिजली व्यवस्था के लिए समझौतों का पालन जरूरी

संघर्ष समिति ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान, समझौतों का सम्मान और औद्योगिक सौहार्द बनाए रखना प्रदेश की मजबूत विद्युत व्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक है। समिति का मानना है कि यदि लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान किया जाता है तो इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रदेश की बिजली व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।

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