Sunday, April 26, 2026
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बिजली दर सुनवाई 2026: 9 मार्च से पहले उपभोक्ता परिषद की मांग – ₹51,000 करोड़ सरप्लस के आधार पर घटाई जाए बिजली दरें

लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश में बिजली दरों को लेकर बड़ी बहस शुरू होने जा रही है। प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तावित नई बिजली दरों पर सुनवाई 9 मार्च से नोएडा में शुरू होगी। सुनवाई से पहले ही उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार से बिजली दरों में कटौती की मांग उठाई है।

परिषद का कहना है कि प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं का वितरण कंपनियों पर लगभग ₹51,000 करोड़ से अधिक का सरप्लस निकल रहा है। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि करने के बजाय उपभोक्ताओं को राहत दी जानी चाहिए और बिजली की दरों में कमी की जानी चाहिए।

बिजली कंपनियों ने फिर मांगी दरों में बढ़ोतरी

वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बिजली कंपनियों ने अपने टैरिफ प्रस्ताव में लगभग ₹12,000 करोड़ से अधिक का घाटा दिखाते हुए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।

इस पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कड़ा विरोध जताया है और कहा है कि परिषद पूरी तैयारी के साथ 9 मार्च से शुरू होने वाली सुनवाई में उपभोक्ताओं का पक्ष मजबूती से रखेगी

सरकार से धारा 108 लागू करने की मांग

सुनवाई से पहले परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 का प्रयोग करे।

उन्होंने कहा कि यह लोक महत्व का विषय है, इसलिए सरकार को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग को स्पष्ट निर्देश देना चाहिए कि उपभोक्ताओं के सरप्लस को ध्यान में रखते हुए बिजली दरों में कमी सुनिश्चित की जाए।

3.72 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलनी चाहिए राहत

अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश में लगभग 3 करोड़ 72 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। ऐसे में सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह उपभोक्ताओं के हित में निर्णय लेते हुए बिजली दरों को कम कराने की दिशा में पहल करे।

24 घंटे बिजली आपूर्ति पर भी उठे सवाल

उपभोक्ता परिषद ने बिजली आपूर्ति की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। परिषद का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2020 से 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रावधान है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी 18 घंटे का रोस्टर लागू है।

होली के दौरान जहां कई क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली दी गई, वहीं अब ग्रामीण इलाकों में फिर से 18 घंटे की आपूर्ति लागू कर दी गई है। गर्मी शुरू होने के साथ बिजली कटौती की समस्या और बढ़ सकती है।

सरकार से स्पष्ट नीति की मांग

उपभोक्ता परिषद ने सरकार से मांग की है कि वह बिजली दरों में कमी, 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। इससे प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिल सकेगी।

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