उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी अंतिम आंकड़ों ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा बढ़ा दी है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम सूची से हटाए गए हैं।
इस अभियान की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी और करीब 166 दिनों तक चला। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पहले जहां कुल मतदाता लगभग 15.44 करोड़ थे, वहीं अंतिम सूची में यह संख्या घटकर करीब 13.39 करोड़ रह गई।
क्या कहते हैं आंकड़े?
कुल मतदाता: ~13.39 करोड़
पुरुष: ~7.30 करोड़
महिला: ~6.09 करोड़
तृतीय लिंग: 4,200+
हटाए गए नामों के पीछे मुख्य कारण बताए गए:
स्थान परिवर्तन
मृत्यु
डुप्लीकेट एंट्री
दस्तावेज़ सत्यापन में कमी
अपील का विकल्प
Election Commission of India की प्रक्रिया के अनुसार:
प्रभावित मतदाता 15 दिन के भीतर अपील कर सकते हैं
जिला स्तर से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक अपील का विकल्प
नया नाम जोड़ने के लिए Form-6 उपलब्ध
किन क्षेत्रों में ज्यादा असर?
रिपोर्ट्स के अनुसार:
लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, गाजियाबाद जैसे शहरी क्षेत्रों में ज्यादा बदलाव
कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नाम हटे
राजनीतिक असर पर चर्चा
इस बदलाव के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
जहां एक तरफ सत्तारूढ़ नेतृत्व जैसे Yogi Adityanath की रणनीतियों पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं विपक्षी नेता Akhilesh Yadav इसे चुनावी समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों और सत्यापन के आधार पर की गई है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।
निष्कर्ष
यह मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रशासनिक रूप से एक बड़ा कदम है, जिसका असर आने वाले चुनावों में दिख सकता है। हालांकि अंतिम प्रभाव चुनावी भागीदारी और मतदान प्रतिशत पर निर्भर करेगा।
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