लखनऊ। खालसा इंटर कॉलेज में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस श्रद्धा, संवेदना और गंभीरता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के समय जान गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापन का दंश झेलने वाले लाखों परिवारों के संघर्ष, पीड़ा और त्याग को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्रधानाचार्य सरदार विरेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का विभाजन देश के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय रहा है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य केवल उस दौर की त्रासदी को याद करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर समाज में आपसी भाईचारे, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द की भावना को और मजबूत करना भी है।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इतिहास की इन घटनाओं से प्रेरणा लेते हुए देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जिम्मेदारीपूर्वक योगदान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इससे पूर्व सुबह आयोजित प्रार्थना सभा में कॉलेज के प्रवक्ता वी.के. श्रीवास्तव ने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले देश के अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की वीरगाथाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों से परिचित कराते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी देश के भविष्य की आधारशिला है।
उन्होंने सभी विद्यार्थियों, विशेषकर युवाओं से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए एकजुट होकर सकारात्मक योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति के लिए शिक्षा, अनुशासन, एकता और सामाजिक जिम्मेदारी को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में कॉलेज के उप प्रधानाचार्य नीरज श्रीवास्तव सहित समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर स्टाफ उपस्थित रहा। आयोजन के दौरान विभाजन की त्रासदी में प्रभावित लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
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