चित्रकूट में करीब एक सप्ताह तक मंदाकिनी नदी के रौद्र रूप के बाद अब नदी का जलस्तर तेजी से नीचे आ गया है। पानी कम होते ही रामघाट में बाढ़ से हुई भारी तबाही की तस्वीर सामने आने लगी है। कुछ दिन पहले जिस रामघाट में तेज बहाव के साथ चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था, वहां अब सड़क, घर और दुकानों में जमा मलबा बाढ़ की भयावहता की कहानी बयां कर रहा है।
मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया था। बाढ़ का पानी रामघाट के कई हिस्सों में पहुंच गया था और तेज बहाव के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और बाढ़ के दौरान लगातार बदलते हालात पर नजर बनाए रखना था।
अब जब मंदाकिनी नदी का पानी उतर चुका है और नदी अपने सामान्य स्वरूप में लौटने लगी है, तो बाढ़ के बाद की असली तस्वीर सामने आई है। रामघाट की सड़कों पर जगह-जगह मिट्टी, गाद, पत्थर और दूसरे मलबे की मोटी परत जमा है। कई स्थानों पर मलबा इतना ज्यादा है कि सड़क का मूल स्वरूप तक दिखाई नहीं दे रहा है।
बाढ़ का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। रामघाट में कई घरों और दुकानों के अंदर भी पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा पहुंच गया। दुकानदारों को अपना सामान निकालने और प्रतिष्ठानों की सफाई करने में काफी परेशानी हो रही है। कई जगहों पर मलबे की कई फीट मोटी परत दिखाई दे रही है, जिसे हटाने में समय लग सकता है।
बाढ़ के तेज बहाव ने रामघाट के आसपास मौजूद कई ढांचों को भी नुकसान पहुंचाया है। तुलसीदास जी की प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी चिंता है। इसके अलावा बाढ़ के दौरान बिजली के कई पोल भी टूट गए हैं। बिजली व्यवस्था को सामान्य करने के लिए भी मरम्मत का काम जरूरी होगा।
रामघाट चित्रकूट का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहां सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में बाढ़ के बाद यहां जमा मलबा और टूटी संरचनाएं स्थानीय लोगों के साथ-साथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत बाढ़ के मलबे को जल्द से जल्द हटाने की है, ताकि सड़क और आसपास के इलाकों में सामान्य गतिविधियां शुरू हो सकें। साथ ही क्षतिग्रस्त बिजली के पोल और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत भी चुनौती बनी हुई है। बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन उसके पीछे छोड़ी गई तबाही को समेटने में प्रशासन और स्थानीय लोगों को अभी काफी मेहनत करनी पड़ेगी।
मंदाकिनी का जलस्तर कम होने के बाद रामघाट की जो तस्वीर सामने आई है, वह बताती है कि बीते दिनों नदी ने किस कदर कहर बरपाया था। जहां पहले तेज बहाव और बाढ़ का पानी दिखाई दे रहा था, वहीं अब मलबे से ढकी सड़कें, क्षतिग्रस्त घर-दुकानें और टूटे बिजली के पोल उस बाढ़ की भयावहता की गवाही दे रहे हैं।
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