उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपने रिश्तों, बुलडोजर मॉडल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग पर खुलकर अपनी राय रखी है।
सबसे ज्यादा चर्चा बालियान के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ रिश्तों में आई दूरी को लेकर कहा, “यूं ही कोई बेवफा नहीं होता, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी।” बालियान ने बताया कि एक समय उनके और योगी आदित्यनाथ के बीच काफी अच्छे संबंध थे। 2014 से 2017 के बीच दोनों संसद में आसपास बैठते थे और उनके बीच बातचीत और मेलजोल रहा।
बालियान ने यह भी बताया कि 2015 में, जब वह केंद्र में मंत्री थे और योगी आदित्यनाथ सांसद थे, तब योगी ने उन्हें गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था। लेकिन 2017 में योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों के बीच पहले जैसा आना-जाना नहीं रहा। बालियान ने यह भी कहा कि योगी आज बहुत बड़े नेता हैं और उनके साथ अपनी तुलना करना उचित नहीं है।
इसके बाद बातचीत का रुख उत्तर प्रदेश के चर्चित बुलडोजर मॉडल की ओर गया। इस मुद्दे पर भी संजीव बालियान ने अपनी व्यक्तिगत राय रखी। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करे, इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बुलडोजर का महिमामंडन या उसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर पेश किया जाना उन्हें पसंद नहीं है। उन्होंने इसे अपनी निजी राय बताते हुए कहा कि इस पर अंतिम राजनीतिक निर्णय उनके हाथ में नहीं है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग भी बालियान ने एक बार फिर उठाई। उनका तर्क प्रशासनिक और न्यायिक सुविधाओं से जुड़ा है। उन्होंने पश्चिमी यूपी से इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर प्रशासनिक और न्यायिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की मांग बालियान पहले भी सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं।
वहीं बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम के साथ अपने रिश्तों को लेकर भी बालियान ने बात की। 2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से मिली हार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के कई कारण होते हैं। उन्होंने राजपूत समाज की पंचायतों और बसपा उम्मीदवार की मौजूदगी को चुनावी नतीजे से जुड़े कारकों के रूप में बताया, साथ ही अपनी कमियों की भी बात की।
संगीत सोम के खिलाफ 2022 में काम करने के आरोपों पर बालियान ने इनकार किया और कहा कि उन्होंने उस चुनाव में संगीत सोम को जिताने के लिए प्रयास किया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके किसी नेता से व्यक्तिगत मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए काम नहीं किया।
अब इन बयानों के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में कई मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं—योगी आदित्यनाथ और संजीव बालियान के पुराने संबंध, दोनों के बीच आई दूरी, बुलडोजर नीति पर बालियान की निजी राय और पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की उनकी मांग। हालांकि, इन बयानों का राजनीतिक असर क्या होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
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