अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ट्रस्ट और सरकार को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर में कथित चोरी कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी जांच एजेंसी या अदालत द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
बहराइच जिले के पयागपुर में आयोजित गौ रक्षा जनजागरण यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि मंदिरों का संचालन धार्मिक संतों और परंपराओं के अनुसार होना चाहिए, न कि सरकार के प्रभाव में। उनका आरोप था कि सरकार ने अपनी पसंद के लोगों को ट्रस्ट में शामिल किया, जिसके कारण कथित अनियमितताओं की स्थिति पैदा हुई।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि मंदिर ट्रस्ट पूरी तरह धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संचालित होता, तो ऐसी घटनाओं की नौबत नहीं आती। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। शंकराचार्य ने दावा किया कि उनके इस्तीफे की खबर केवल दिखावा है। उनका कहना था कि उन्होंने ऐसा कोई आधिकारिक इस्तीफा सार्वजनिक रूप से नहीं देखा और मीडिया में आई कुछ तस्वीरों में कथित तौर पर प्रवेश पास पर अब भी चंपत राय के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच उन्हीं संस्थाओं या लोगों के माध्यम से होगी जो पहले से व्यवस्था का हिस्सा हैं, तो निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने मांग की कि यदि किसी तरह की अनियमितता के आरोप हैं तो उनकी पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
इस दौरान शंकराचार्य ने अपने लंबे समय से उठाए जा रहे एक अन्य मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गाय को “राष्ट्र माता” का दर्जा दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जो सरकारें ऐसा नहीं करतीं, उन्हें इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह उनकी पहले भी कई बार दोहराई गई मांग रही है।
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े मामलों को लेकर समय-समय पर अलग-अलग पक्षों की ओर से बयान सामने आते रहे हैं। वहीं ट्रस्ट की ओर से भी विभिन्न आरोपों पर समय-समय पर अपना पक्ष रखा जाता रहा है। किसी भी आरोप की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।
फिलहाल शंकराचार्य द्वारा लगाए गए आरोप सार्वजनिक बयान हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया या जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए इस मामले को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष क्या जवाब देते हैं और यदि कोई जांच होती है तो उसके निष्कर्ष क्या सामने आते हैं।
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