वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात से लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG लेकर एक जहाज बेहद गोपनीय तरीके से भारत पहुंचा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस जहाज ने खतरनाक समुद्री इलाके से गुजरते समय अपना ट्रांसपोंडर सिग्नल बंद रखा और भारत के करीब पहुंचने के बाद ही उसे दोबारा चालू किया।
बताया जा रहा है कि यह जहाज अबू धाबी के दास आइलैंड से LNG लेकर रवाना हुआ था। उस समय भी जहाज ने अपना सिग्नल बंद रखा ताकि उसकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके। इसके बाद जहाज बिना किसी ट्रांसमिशन के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और पर्शियन गल्फ जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरता हुआ सुरक्षित भारत पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया। ईरान-अमेरिका तनाव और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच कई जहाज सुरक्षा के लिए अपनी लोकेशन सार्वजनिक नहीं करते। हालांकि भारत के करीब पहुंचने के बाद जहाज ने अपना सिग्नल ऑन कर दिया, जिसके बाद इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी सामने आई।
इस घटनाक्रम को भारत और संयुक्त अरब अमीरात की मजबूत रणनीतिक साझेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया विदेश यात्रा से पहले UAE में हुई हाई लेवल बैठक में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई थी। ऐसे समय में जब दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, भारत लगातार वैकल्पिक स्रोतों से तेल और गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने में जुटा है।
इसी बीच एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वेनेजुएला अचानक भारत का प्रमुख तेल सप्लायर बनकर उभरा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार मई महीने में वेनेजुएला ने भारत को प्रतिदिन हजारों बैरल कच्चा तेल सप्लाई किया। इससे पहले लंबे समय तक अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के वेनेजुएला से तेल खरीदने का सबसे बड़ा कारण कम कीमत है। रूस और खाड़ी देशों से मिलने वाला तेल लगातार महंगा हो रहा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव बढ़ने के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में भारत सस्ते विकल्प तलाश रहा है ताकि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।
वेनेजुएला का क्रूड ऑयल भारी और हाई सल्फर वाला माना जाता है। इसे रिफाइन करने की क्षमता दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों के पास ही है। भारत की कई रिफाइनरियां इस तरह के भारी क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं, यही वजह है कि भारत के लिए यह तेल आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में भारत की रणनीति साफ है कि वह अलग-अलग देशों से सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करके अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखे।
![]()

