भारत की आज़ादी के बाद से अब तक केंद्रीय बजट केवल आमदनी और खर्च का दस्तावेज़ नहीं रहा, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा तय करने का सबसे अहम औज़ार रहा है।
आज जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया, तो एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आ गया कि 1947 से लेकर 2026 तक भारत की अर्थव्यवस्था को किस-किसने दिशा दी।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आज़ादी के बाद से अब तक किन दिग्गज नेताओं ने वित्त मंत्री के रूप में भारत की आर्थिक नींव मजबूत की और उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां क्या रहीं।
आज़ादी के बाद पहला बजट: 1947 से शुरुआत
देश को आज़ादी मिलने के बाद भारत गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था।
नवंबर 1947 में स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश किया गया, जिसने आर्थिक नीति की आधारशिला रखी।
🔹 आर. के. शनमुखम चेट्टी (1947–1948)
आर. के. शनमुखम चेट्टी स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री बने।
उन्होंने 26 नवंबर 1947 को पहला केंद्रीय बजट पेश किया।
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अनुमानित आय: ₹171.15 करोड़
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अनुमानित खर्च: ₹197.39 करोड़
🔹 जॉन मथाई (1948–1950)
जॉन मथाई के कार्यकाल में
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पंचवर्षीय योजनाओं की नींव पड़ी
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योजना आयोग की भूमिका को लेकर मतभेदों के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया
🔹 सी. डी. देशमुख (1950–1956)
सी. डी. देशमुख
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पहले अंतरिम बजट (1951-52) के प्रस्तुतकर्ता
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आयकर और सुपर टैक्स पर सरचार्ज का प्रस्ताव
🔹 टी. टी. कृष्णमाचारी (1956–1958, 1963–1965)
टी. टी. कृष्णमाचारी
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संपत्ति कर और व्यय कर की शुरुआत
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IDBI और DVC जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना
🔹 पंडित जवाहरलाल नेहरू (अतिरिक्त प्रभार)
जवाहरलाल नेहरू
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बजट पेश करने वाले पहले प्रधानमंत्री
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उपहार कर (Gift Tax) की शुरुआत
🔹 मोरारजी देसाई (1958–1963, 1967–1969)
मोरारजी देसाई
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10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड
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पति-पत्नी को अलग करदाता बनाया
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कृषि अनुसंधान परिषद को मजबूती
🔹 इंदिरा गांधी (1969–1970)
इंदिरा गांधी
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गरीबों और जरूरतमंदों पर केंद्रित आर्थिक नीति
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विकास और सामाजिक न्याय का संतुलन
🔹 यशवंतराव चव्हाण (1970–1974)
यशवंतराव चव्हाण
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कोयला खदानों और बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण
🔹 आर. वेंकटरमन (1980–1982)
आर. वेंकटरमन
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आवश्यक वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क में छूट
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आगे चलकर भारत के राष्ट्रपति बने
🔹 प्रणब मुखर्जी (1982–1984, 2009–2012)
प्रणब मुखर्जी
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घाटा नियंत्रण
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सामाजिक योजनाओं पर जोर
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राष्ट्रपति पद तक का सफर
🔹 वी. पी. सिंह (1984–1987)
वी. पी. सिंह
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लघु उद्योग विकास बैंक
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गरीब-हितैषी योजनाएं
🔹 डॉ. मनमोहन सिंह (1991–1996)
मनमोहन सिंह
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उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG)
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भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर ले गए
🔹 अरुण जेटली (2014–2019)
अरुण जेटली
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GST लागू
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बजट की तारीख 1 फरवरी की
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नोटबंदी जैसे बड़े फैसले
🔹 निर्मला सीतारमण (2019–वर्तमान)
निर्मला सीतारमण
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इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला वित्त मंत्री
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अब तक 9 बजट पेश
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आत्मनिर्भर भारत और संरचनात्मक सुधारों पर फोकस
निष्कर्ष
1947 से 2026 तक भारत की आर्थिक यात्रा कई उतार-चढ़ावों से गुज़री है।
हर वित्त मंत्री ने अपने समय की चुनौतियों के अनुसार नीतियां बनाईं और देश को आगे बढ़ाया।
आज का भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, और इसकी नींव इन्हीं दशकों में रखी गई।
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