भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर घरेलू शराब उद्योग ने सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies (CIABC) ने कहा है कि आयात शुल्क और कर ढांचे में बदलाव करते समय घरेलू निर्माताओं के लिए समान और निष्पक्ष अवसर (Level Playing Field) सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
संगठन का कहना है कि शराब और पेय पदार्थों पर शुल्क संरचना भारत द्वारा ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के अनुरूप होनी चाहिए।
आयात शुल्क में कटौती पर चरणबद्ध तरीका अपनाने की मांग
CIABC ने स्पष्ट किया कि वह आयात शुल्क में कटौती के खिलाफ नहीं है, लेकिन चाहता है कि यह चरणबद्ध तरीके से लागू की जाए।
संगठन के महानिदेशक अनंत एस अय्यर ने कहा कि सरकार को गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए।
उनके अनुसार,
“हम उम्मीद करते हैं कि सरकार आयात के मुकाबले घरेलू उद्योग को समान अवसर प्रदान करेगी और गैर-शुल्क बाधाओं से जुड़े हमारे सुझावों पर समाधान निकालेगी।”
घरेलू उद्योग पर बढ़ती लागत का दबाव
CIABC ने यह भी कहा कि भारतीय शराब उद्योग पहले से ही:
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ऊंची पूंजी लागत
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अधिक परिचालन खर्च
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सख्त और जटिल लाइसेंसिंग व्यवस्था
जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। संगठन के मुताबिक, विकसित देशों के निर्माताओं की तुलना में भारतीय कंपनियां पहले ही नुकसान की स्थिति में हैं।
राज्यों से एक्साइज रियायतें वापस लेने की अपील
संगठन ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे आयातित शराब को दी जा रही उत्पाद शुल्क (Excise) रियायतें वापस लें।
CIABC ने चेतावनी दी कि:
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यदि सीमा शुल्क में कटौती
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और साथ ही एक्साइज रियायतें
दोनों जारी रहीं, तो यह घरेलू निर्माताओं के लिए “दोहरी मार” साबित हो सकती है।
कुछ राज्यों में सीधे विदेशों से बोतलबंद होकर आने वाली शराब (BIO) के लिए कर ढांचा अधिक अनुकूल बताया जा रहा है, जिससे स्वदेशी उद्योग को नुकसान हो रहा है।
डंपिंग रोकने और निर्यात पहुंच बढ़ाने की मांग
CIABC ने सरकार से यह भी मांग की है कि आयातित शराब की डंपिंग (लागत से कम कीमत पर बिक्री) को रोकने के लिए सख्त उपाय किए जाएं।
साथ ही, संगठन ने भारतीय शराब उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहुंच की वकालत की।
संगठन के अनुसार, भारतीय उत्पादों को:
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ब्रिटेन
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यूरोपीय संघ
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ऑस्ट्रेलिया
जैसे बाजारों में कई तरह की गैर-शुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
India-US अंतरिम व्यापार समझौते की प्रमुख बातें
भारत और अमेरिका ने शनिवार को एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
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अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50% से घटाकर 18% करेगा
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भारत, अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और
वाइन-स्पिरिट सहित कृषि उत्पादों पर
शुल्क कम या समाप्त करेगा
घरेलू उद्योग का मानना है कि इन प्रावधानों को लागू करते समय संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
India-US Trade Deal को लेकर घरेलू शराब उद्योग ने सरकार से निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और संतुलित नीति की मांग की है।
CIABC का कहना है कि यदि आयात शुल्क में कटौती की जाती है, तो घरेलू उद्योग की लागत संरचना, कर नीति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।
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