Wednesday, April 22, 2026
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UCC पर RSS प्रमुख मोहन भागवत की साफ राय: सभी को विश्वास में लेकर ही बने कानून

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर कानून बनाते समय समाज के सभी वर्गों को विश्वास में लेना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार का मतभेद या टकराव पैदा न हो।

यह बात मोहन भागवत ने रविवार को आरएसएस के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही।


UCC पर क्या बोले मोहन भागवत?

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि विभाजन पैदा करना।
उन्होंने जोर दिया कि:

“समान नागरिक संहिता बनाते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि सभी समुदायों को विश्वास में लिया जाए और इससे समाज में मतभेद न बढ़ें।”

उनके इस बयान को संवाद और सहमति आधारित दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।


भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी रखी राय

हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों में लेन-देन स्वाभाविक होता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि देश के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे।

उन्होंने कहा,

“ऐसे समझौते दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होने चाहिए। हमें यह देखना होगा कि भारत को किसी तरह का नुकसान न हो।”


वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर बयान

हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यदि सावरकर को यह सम्मान दिया जाता है, तो इससे भारत रत्न की गरिमा और बढ़ेगी

उन्होंने सावरकर के योगदान को भारतीय इतिहास और राष्ट्रवाद के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया।


RSS में ‘अच्छे दिन’ कैसे आए?

RSS के संदर्भ में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संगठन के लिए ‘अच्छे दिन’ किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और वैचारिक प्रतिबद्धता के चलते आए हैं।

उन्होंने कहा कि संघ का कार्य निरंतर समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा रहा है।


निष्कर्ष

RSS प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान को UCC, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर संतुलित और विचारपूर्ण दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
यूसीसी को लेकर उनका जोर संवाद, सहमति और सामाजिक सौहार्द पर है, जो आने वाले समय में नीति-निर्माण की दिशा को प्रभावित कर सकता है।


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