नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम बहस का रास्ता साफ हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 5 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की है।
कब होगी सुनवाई?
अदालत द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार:
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5 मई 2026: याचिकाकर्ताओं की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की जाएंगी।
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6 मई 2026 (आधा दिन): याचिकाकर्ताओं की बहस जारी रहेगी।
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6 मई 2026 (शेष आधा दिन): केंद्र सरकार की ओर से जवाबी तर्क शुरू होंगे।
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7 मई 2026: केंद्र सरकार अपने तर्क आगे रखेगी।
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पूरी कार्यवाही के 12 मई तक समाप्त होने की संभावना जताई गई है।
अदालत ने संकेत दिया है कि असम और त्रिपुरा से जुड़े विशेष मुद्दों पर मुख्य बहस समाप्त होने के बाद अलग से सुनवाई की जाएगी।
CAA को लेकर क्या है विवाद?
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए छह धार्मिक समुदायों—हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई—के उन लोगों को भारतीय नागरिकता की प्रक्रिया में राहत दी गई है, जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आ चुके हैं और धार्मिक उत्पीड़न का दावा करते हैं।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून समानता के सिद्धांत के विपरीत है, क्योंकि इसमें अन्य समुदायों—जैसे रोहिंग्या या अहमदी—को शामिल नहीं किया गया है। इसी आधार पर इसकी संवैधानिकता को चुनौती दी गई है।
अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों को चार सप्ताह के भीतर लिखित प्रस्तुतियां और संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी है। हालांकि, पहले से दाखिल दस्तावेजों के आधार पर नई रिट याचिका दाखिल करने की अनुमति नहीं होगी।
गौरतलब है कि इससे पहले 19 मार्च 2024 को अदालत ने CAA नियमों पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उस समय याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि सुनवाई लंबित रहने के दौरान नागरिकता दिए जाने से स्थिति “अपरिवर्तनीय” हो सकती है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया था।
पृष्ठभूमि
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CAA को संसद ने दिसंबर 2019 में पारित किया था।
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यह कानून 10 जनवरी 2020 से प्रभावी हुआ।
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इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में इस पर व्यापक बहस और विरोध-समर्थन देखा गया।
अब 5 मई से शुरू होने वाली सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ साबित हो सकती है।
(यह समाचार केवल तथ्यात्मक जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।)
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