लखनऊ। बच्चों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक समझ विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित ‘दादी–नानी की कहानी’ कार्यक्रम में एक बार फिर सीख और प्रेरणा का अनूठा संगम देखने को मिला। सोमवार को आयोजित इस सत्र में बच्चों को एकता, सहयोग और नेकदिली का महत्व कहानी के माध्यम से समझाया गया।
जानकीपुरम में हुआ आयोजन, बच्चों की रही सक्रिय भागीदारी
जानकीपुरम सेक्टर-डी स्थित नीलाक्षी अनौपचारिक शिक्षा केन्द्र में लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा ‘दादी–नानी की कहानी’ मासिक श्रृंखला का 79वां आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भाषा विकास गतिविधि से हुई, जिसमें बच्चों को कठिन शब्दों और वाक्यों के सही उच्चारण का अभ्यास कराया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की भाषाई क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करना था।
प्रेरक कहानी से समझाया गया एकता का महत्व
स्टोरीटेलर जीतेश ने ‘बाहुबली, बुद्धिराम और नेकचन्द्र चौबे’ की प्रेरक कहानी सुनाई। यह कहानी तीन भाइयों की है, जो क्रमशः शक्ति, बुद्धि और नेकदिली के प्रतीक हैं।
तीनों भाई अपनी एकता और आपसी तालमेल के कारण पूरे गांव में आदर्श माने जाते थे, लेकिन कुछ गलतफहमियों के कारण उनके बीच दूरियां आ गईं।
कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब एक दिन नदी में डूबती एक बच्ची को बचाने के लिए तीनों भाइयों ने अपने मतभेद भुलाकर एकजुट होकर प्रयास किया। उनकी एकता और सामूहिक प्रयास से बच्ची की जान बच गई।
इस घटना ने उन्हें एक बार फिर यह एहसास दिलाया कि एकता और सहयोग से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।
बच्चों को मिला मजबूत नैतिक संदेश
कार्यक्रम के अंत में बच्चों को बताया गया कि जीवन में सफलता के लिए केवल ताकत या बुद्धि ही नहीं, बल्कि नेकदिली, सहयोग और आपसी एकता भी जरूरी है।
इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें एक बेहतर नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर राज वर्मा, नीलम वर्मा, सपना, पुष्पा देवी और डॉ. एस.के. गोपाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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