लखनऊ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर विरोध तेज हो गया है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में डिप्लोमा इंजीनियर्स कार्यालय, राजभवन गेट नंबर-1 के सामने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों की एकजुटता
बैठक में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के सभी घटक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान आंदोलन के पहले चरण “शिक्षा की पाती अभियान” की सफलता पर प्रसन्नता जताई गई और प्रदेशभर के शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है, जो यह संकेत देता है कि शिक्षक समाज अब अपने अधिकारों के लिए पूरी तरह तैयार है।
RTE 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET लागू करना ‘अन्याय’
बैठक में जोर देकर कहा गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से पहले सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर TET अनिवार्यता लागू करना अनुचित है।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि यह निर्णय उनके सेवा अधिकारों, सम्मान और संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ है। उन्होंने इसे पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू करने को पूरी तरह अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण बताया।
13 अप्रैल 2026 को मशाल जुलूस, राज्यभर में तैयारी
आंदोलन के दूसरे चरण के तहत 13 अप्रैल 2026 को मशाल जुलूस निकालने का निर्णय लिया गया। इसको सफल बनाने के लिए ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर रणनीति तैयार की गई है।
प्रदेश सह-संयोजक विक्रमादित्य मौर्य ने कहा कि यदि सरकार और संबंधित अधिकारी समय रहते शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते, तो आंदोलन को और व्यापक और निर्णायक रूप दिया जाएगा।
“शिक्षक अब चुप नहीं रहेंगे” — संगठनों की चेतावनी
जिला संयोजक वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि “शिक्षा की पाती अभियान” को मिले समर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे।
सुरेश जायसवाल ने इसे लाखों शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बताया।
लल्ली सिंह ने कहा कि प्रस्तावित मशाल जुलूस शिक्षक अस्मिता, एकता और संघर्ष का प्रतीक बनेगा।
विनीत सिंह और अवधेश कुमार ने भी TET अनिवार्यता को सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर थोपने को अनुचित बताते हुए विरोध जारी रखने की बात कही।
सामूहिक निष्कर्ष: आंदोलन होगा और व्यापक
बैठक के अंत में सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षक अपने अधिकारों के लिए संगठित और सशक्त संघर्ष करें।
सभी जनपद संयोजकों, ब्लॉक इकाइयों और शिक्षक साथियों से अपील की गई कि वे 13 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित मशाल जुलूस को ऐतिहासिक बनाने के लिए अधिकतम संख्या में भाग लें।
बैठक में मौजूद प्रमुख लोग
इस बैठक में प्रकाश चंद्र तिवारी, आशुतोष मिश्रा, बृजेश कुमार मौर्य, दिनेश कुमार सिंह, डॉ. अलका राजवंशी, शालिनी मिश्रा, अर्पण गुप्ता, मोहम्मद रियाज, मनीष खरे और बृजेश सिंह सहित कई शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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