जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 को लेकर भारतीय खेल प्रेमियों की निगाहें देश के स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हैं। निशानेबाजी से लेकर वेटलिफ्टिंग और बैडमिंटन तक, भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने की तैयारी में हैं। लेकिन किन खिलाड़ियों से पदक की उम्मीदें जुड़ी हैं? कौन अपने अनुभव और हालिया प्रदर्शन के दम पर चर्चा में है? आइए जानते हैं।
एशियाई खेलों की शुरुआत 1951 में हुई थी। यह प्रतियोगिता एशिया के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच देती है। भारत के लिए भी यह आयोजन अहम है, क्योंकि यहां का प्रदर्शन भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी और खिलाड़ियों के अनुभव से जुड़ा है।
सबसे पहले बात करते हैं निशानेबाज ईशा सिंह की। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल स्पर्धाओं में उनका प्रदर्शन उन्हें भारतीय शूटिंग की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल करता है। दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस वर्ष ISSF विश्व कप में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीते और म्यूनिख में फाइनल के दौरान 43 में से 50 का स्कोर बनाया, जिसे विश्व रिकॉर्ड बताया गया है।
ईशा ने एशियाई चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए हैं। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण और 25 मीटर पिस्टल व्यक्तिगत मुकाबले में रजत पदक उनके प्रदर्शन का हिस्सा बताए गए हैं। टीम स्पर्धाओं में भी उन्होंने भारतीय निशानेबाजों के साथ पदक जीते हैं। अब एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन पर नजर रहेगी।
दूसरा बड़ा नाम है मीराबाई चानू का। भारत की अनुभवी वेटलिफ्टर ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं। टोक्यो ओलंपिक 2021 में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था, जबकि 2017 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था।
मीराबाई के लिए एशियाई खेलों का मंच एक और महत्वपूर्ण चुनौती होगा। वेटलिफ्टिंग में मुकाबला खिलाड़ियों के वजन वर्ग और स्नैच तथा क्लीन एंड जर्क में प्रदर्शन पर निर्भर करता है। ऐसे में उनकी तैयारी, फिटनेस और प्रतियोगिता के दिन का प्रदर्शन अहम रहेगा।
अब बात करते हैं भारत की मशहूर पुरुष बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की। इस जोड़ी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और बड़े मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
सात्विक और चिराग की ताकत उनकी तेज आक्रामक शैली, तालमेल और कोर्ट पर दबाव बनाने की क्षमता मानी जाती है। चोटों और उतार-चढ़ाव के बावजूद उनकी वापसी और प्रदर्शन पर खेल प्रेमियों की नजर रहती है। एशियाई खेलों में उन्हें मजबूत अंतरराष्ट्रीय जोड़ियों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए हर मुकाबला अहम होगा।
इन खिलाड़ियों के अलावा भारतीय क्रिकेट और पुरुष हॉकी टीम भी एशियाई खेलों में पदक की दौड़ में शामिल हो सकती हैं। टीम स्पर्धाओं में खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ-साथ रणनीति, तालमेल और पूरे टूर्नामेंट में निरंतरता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
हालांकि, यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में ईशा सिंह, मीराबाई चानू और सात्विक-चिराग की चर्चा विस्तार से है, लेकिन शीर्षक में बताए गए दसों खिलाड़ियों की पूरी सूची नहीं दी गई है। इसलिए बाकी खिलाड़ियों के नाम या उनकी उपलब्धियां बिना पुष्टि के जोड़ना उचित नहीं होगा।
एशियाई खेल 2026 भारतीय खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर हैं। निशानेबाजी, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, क्रिकेट और हॉकी जैसे खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन पर देशभर की निगाहें रहेंगी। पदक की उम्मीदों के साथ-साथ खिलाड़ियों की तैयारी और प्रतियोगिता में उनका वास्तविक प्रदर्शन ही अंतिम तस्वीर तय करेगा।
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