अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर सख्ती बढ़ रही है, लेकिन अब एक अहम सवाल सामने आया है—क्या नियमों की कड़ाई अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ-साथ देश के नवोन्मेष को भी प्रभावित कर सकती है? भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े एक संगठन ने निगरानी का समर्थन तो किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि वैश्विक प्रतिभाओं के लिए रास्ते बंद करना अमेरिका की तकनीकी प्रगति के लिए चुनौती बन सकता है।
वॉशिंगटन से सामने आए बयान में ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’, यानी FIIDS ने H-1B वीजा आवेदनों की कड़ी जांच का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रीय और आर्थिक हितों की रक्षा करना, स्थानीय कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखना और वीजा कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई करना उचित उद्देश्य हैं।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा कार्यक्रम की निगरानी कड़ी किए जाने के कुछ घंटे बाद आया। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ नियोक्ताओं, जिनमें आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियां भी शामिल हैं, ने इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।
FIIDS के नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड ने कहा कि अमेरिका की नवोन्मेष में वैश्विक अग्रणी भूमिका का एक कारण दुनिया भर से असाधारण प्रतिभाओं को आकर्षित करने की उसकी क्षमता भी रही है। उनके मुताबिक, नियमों को लागू करते समय इस क्षमता को कमजोर करने से बचना जरूरी है।
कांड ने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI, साइबर सुरक्षा, उन्नत सेमीकंडक्टर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेष डेटा इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में नियोक्ताओं को अत्यंत विशिष्ट कौशल वाले कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है, और घरेलू श्रम बाजार से हर जरूरत को तुरंत पूरा करना हमेशा संभव नहीं होता।
संगठन ने यह भी कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों और अत्यधिक कुशल प्रवासियों को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा करना समाधान नहीं है। FIIDS के अनुसार, व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो स्थानीय कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करे और साथ ही वास्तविक जरूरत होने पर योग्य वैश्विक प्रतिभाओं को भर्ती करने का स्पष्ट रास्ता भी उपलब्ध कराए।
कांड ने पारदर्शी और योग्यता-आधारित व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। इसमें धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नियम तोड़ने वालों के लिए ठोस दंड, वेतन और भर्ती से जुड़े मजबूत सुरक्षा उपाय, तथा घरेलू शिक्षा, प्रशिक्षण और नए कौशल विकसित करने में निवेश शामिल होना चाहिए। साथ ही, जिन नियोक्ताओं को विशेष कौशल की वास्तविक जरूरत है, उनके लिए वैध और स्पष्ट भर्ती प्रक्रिया बनाए रखने की बात भी कही गई।
इस मुद्दे के बीच H-1B वीजा से जुड़े शुल्क का मामला भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रंप ने विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा के जरिए अमेरिका लाने वाले नियोक्ताओं पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस ने इसकी जानकारी दी।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि 2025 में एक लाख डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले के बाद बड़ी आईटी कंपनियों के H-1B वीजा पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई। यह आंकड़ा राष्ट्रपति के बयान के तौर पर सामने आया है।
H-1B कार्यक्रम के लाभार्थियों में भारतीय सबसे बड़ा समूह हैं, इसलिए अमेरिका की वीजा नीति में होने वाले बदलाव भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल बहस का केंद्र यही है—दुरुपयोग पर रोक और अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए, जबकि तकनीकी क्षेत्रों में जरूरी कौशल और प्रतिभा को आकर्षित करने की क्षमता भी बनी रहे। FIIDS ने इसी संतुलन पर जोर दिया है।
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