बाइक के साइलेंसर को मॉडिफाई कर तेज और धमाके जैसी आवाज निकालना अब वाहन मालिकों को भारी पड़ सकता है। महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ में पुलिस ने ऐसे मॉडिफाइड और अवैध साइलेंसर के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में ऐसे साइलेंसर जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल बाइक से तेज और कानफोड़ू आवाज निकालने के लिए किया जा रहा था। अब जब्त किए गए इन अवैध साइलेंसर को नष्ट किया जा रहा है।
बाइक स्टार्ट होते ही अगर साइलेंसर से इतनी तेज आवाज निकले कि आसपास के लोग चौंककर पीछे मुड़कर देखने लगें, तो कई बाइक सवार इसे स्टाइल या रौब समझ सकते हैं। लेकिन सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों के लिए ऐसी आवाज काफी परेशान करने वाली हो सकती है। खास तौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए जिन्हें तेज आवाज से परेशानी होती है। इसी समस्या को देखते हुए पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस ने मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ अपना अभियान तेज किया है।
पुलिस की कार्रवाई का मुख्य निशाना ऐसे साइलेंसर हैं जो कंपनी की ओर से लगाए गए सामान्य साइलेंसर को हटाकर लगाए जाते हैं और जिनसे बाइक की आवाज कई गुना ज्यादा तेज हो जाती है। कई मामलों में ऐसे मॉडिफिकेशन से बाइक चलने के दौरान पटाखे या फायरिंग जैसी आवाज सुनाई देती है। यही वजह है कि पुलिस ऐसे साइलेंसर को न सिर्फ जब्त कर रही है, बल्कि जब्त किए गए साइलेंसर को नष्ट भी किया जा रहा है।
पुलिस के इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बाइक सवारों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सड़क पर ध्वनि प्रदूषण को कम करना भी है। तेज आवाज वाले साइलेंसर की वजह से रिहायशी इलाकों, बाजारों और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर लोगों को काफी परेशानी होती है। कई बार अचानक होने वाली तेज आवाज से सड़क पर चल रहे लोग या वाहन चालक भी घबरा सकते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस की कार्रवाई के बाद ऐसे बाइक मालिकों के बीच भी चिंता बढ़ गई है जो अपनी बाइक में कंपनी के मूल साइलेंसर की जगह मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाते हैं। पुलिस का संदेश साफ है कि वाहन में ऐसा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए जिससे उसकी आवाज निर्धारित मानकों से ज्यादा हो जाए या आम लोगों को परेशानी हो।
दरअसल, युवाओं के बीच बाइक को अलग और आकर्षक दिखाने के लिए कई तरह के मॉडिफिकेशन कराने का चलन है। इसमें अलग-अलग तरह के साइलेंसर लगवाना भी शामिल है। सोशल मीडिया पर भी तेज आवाज वाले साइलेंसर से बाइक की वीडियो बनाकर उसे स्टाइल के तौर पर दिखाया जाता है। लेकिन सड़क पर इस तरह के मॉडिफिकेशन का इस्तेमाल करने पर पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
पुलिस की ओर से जब्त किए गए साइलेंसर को नष्ट करने की कार्रवाई भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सिर्फ जुर्माना लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। जब अवैध साइलेंसर ही बाजार में उपलब्ध नहीं होंगे तो बाइक मालिकों के लिए उन्हें लगवाना मुश्किल होगा। इससे तेज आवाज वाले वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।
इस अभियान का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है जो अपनी बाइक से जानबूझकर तेज आवाज निकालकर सड़क पर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। पुलिस ऐसे मामलों में नियमों के मुताबिक कार्रवाई कर सकती है। इसलिए बाइक मालिकों के लिए बेहतर यही है कि वे कंपनी द्वारा दिए गए मानक साइलेंसर का ही इस्तेमाल करें और वाहन में ऐसा बदलाव न करें जिससे ध्वनि प्रदूषण बढ़े।
फिलहाल पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस के इस अभियान से साफ है कि बाइक का साइलेंसर बदलकर फायरिंग जैसी आवाज निकालना अब सिर्फ शौक या स्टाइल का मामला नहीं रहेगा। पुलिस ऐसे मॉडिफाइड साइलेंसर को जब्त करने के साथ उन्हें नष्ट भी कर रही है। आने वाले दिनों में अगर यह अभियान और तेज होता है, तो सड़कों पर कानफोड़ू आवाज वाली बाइकों की संख्या कम हो सकती है और आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
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