ओडिशा की राजनीति में खनन कानून को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज होता दिखाई दे रहा है। बीजू जनता दल यानी BJD के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के बीजेपी सांसदों को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से खनन कानून में किए गए हालिया संशोधनों को वापस लेने की मांग की है। पटनायक ने इन बदलावों को ओडिशा के हितों के खिलाफ बताते हुए बीजेपी सांसदों से अपील की है कि वे संसद में राज्य के अधिकारों और लोगों के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाएं।
नवीन पटनायक ने शनिवार को लिखे अपने पत्र में ओडिशा के सत्ताधारी बीजेपी के सांसदों से कहा कि उन्हें उन लोगों के हितों की रक्षा करनी चाहिए, जिन्होंने उन्हें संसद तक पहुंचाया है। पटनायक का कहना है कि खनन से जुड़े कानूनों में किए गए बदलावों का ओडिशा पर दूरगामी असर पड़ सकता है। उन्होंने बीजेपी सांसदों से इस मुद्दे पर राज्य के हित को प्राथमिकता देने की अपील की है।
पटनायक का मुख्य विरोध माइंस एंड मिनरल्स यानी MMDR एक्ट में किए गए बदलावों को लेकर है। उनके अनुसार, इन संशोधनों से राज्य सरकार की खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीन पर टैक्स लगाने की शक्तियां सीमित हो सकती हैं। उनका तर्क है कि खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य होने के कारण ओडिशा को इन संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।
यह विवाद इस महीने की शुरुआत में संसद से पारित किए गए ‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ से जुड़ा है। नवीन पटनायक का कहना है कि कानून में किए गए बदलाव सिर्फ प्रशासनिक स्तर का विषय नहीं हैं, बल्कि इनका असर राज्य की वित्तीय स्थिति और खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों पर पड़ सकता है।
ओडिशा देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन और उससे जुड़े उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और क्रोमाइट जैसे खनिजों के उत्पादन के कारण ओडिशा का खनन क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में खनिज संसाधनों से जुड़े कानून में बदलाव राज्य सरकार के लिए संवेदनशील राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा बन सकता है।
नवीन पटनायक ने अपने पत्र के जरिए बीजेपी सांसदों को सीधे राज्य के हित से जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सांसदों की जिम्मेदारी सिर्फ अपनी पार्टी की नीतियों का समर्थन करना नहीं, बल्कि उन लोगों के हितों की रक्षा करना भी है जिन्होंने उन्हें चुनकर संसद में भेजा है। ऐसे में पटनायक की अपील बीजेपी सांसदों के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BJD और बीजेपी के बीच ओडिशा में पहले भी कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी सरकार और विपक्षी BJD के बीच नीतियों को लेकर लगातार बहस होती रही है। अब खनन कानून में संशोधन का मुद्दा भी इसी राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।
पटनायक का कहना है कि अगर राज्य के खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार और राजस्व जुटाने की शक्तियां सीमित होती हैं, तो इसका असर भविष्य में ओडिशा की वित्तीय क्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने संशोधनों की समीक्षा और उन्हें वापस लेने की मांग की है। वहीं, इन बदलावों को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी का पक्ष अलग हो सकता है और कानून के पीछे सरकार की अपनी नीतिगत वजहें हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओडिशा के बीजेपी सांसद नवीन पटनायक की इस अपील पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या वे राज्य के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे या केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन करेंगे, यह आने वाले समय में साफ होगा।
फिलहाल नवीन पटनायक का पत्र ओडिशा की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म देता दिखाई दे रहा है। खनिज संसाधनों और राज्य के राजस्व अधिकारों से जुड़ा यह मुद्दा आने वाले दिनों में विधानसभा से लेकर संसद तक राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।
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