दिल्ली के बहुचर्चित 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में बड़ा फैसला सामने आया है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व एमसीडी पार्षद और पूर्व आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है और भारतीय जनता पार्टी तथा आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
यह मामला फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा है। उन दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। उनकी मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इस मामले की जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब अदालत ने ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है।
अदालत के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन कभी आम आदमी पार्टी का चेहरा थे और इस मामले में अदालत का फैसला गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी नेताओं ने इसे कानून के शासन की जीत बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि ताहिर हुसैन का पार्टी से लंबे समय पहले ही संबंध खत्म हो चुका था। पार्टी का कहना है कि जैसे ही उनके खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए थे, उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। आम आदमी पार्टी ने यह भी कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी दोषी को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
इस फैसले के बाद एक बार फिर 2020 के दिल्ली दंगों की चर्चा तेज हो गई है। उन दंगों में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। कई घरों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा था। जांच एजेंसियों ने कई मामलों में अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए थे और अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली।
कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद अब अदालत अगले चरण में सजा पर सुनवाई करेगी। इसी दौरान यह तय होगा कि दोषियों को किस प्रकार की सजा दी जाएगी। बचाव पक्ष के पास उच्च अदालत में फैसले को चुनौती देने का कानूनी अधिकार भी उपलब्ध रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक मामले पर आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
फिलहाल, कड़कड़डूमा अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा और आगे की कानूनी कार्रवाई पर बनी हुई है।
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