संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की अस्थायी सीट के लिए भारत ने अपना चुनावी अभियान आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए होने वाले इस चुनाव में भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से है। लेकिन इस बार भारत केवल एक सीट जीतने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत और नेतृत्व क्षमता भी दिखाना चाहता है।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की दावेदारी के साथ एक नया विज़न भी पेश किया। इसका नाम है SHANTI यानी Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity। इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय नियमों, आपसी विश्वास और ईमानदारी के आधार पर वैश्विक शांति और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
भारत ने इस अभियान के तहत छह प्रमुख प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखा है। इनमें सबसे पहले ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत करना शामिल है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में सुधार, आधुनिक तकनीक से लैस शांति सेना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग के लिए वैश्विक नियम, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को प्रमुख एजेंडा बनाया गया है।
हालांकि भारत की राह आसान नहीं है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की इस एकमात्र सीट के लिए ताजिकिस्तान भी मजबूत दावेदार है। रिपोर्टों के अनुसार ताजिकिस्तान को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के कई सदस्य देशों का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में गुप्त मतदान में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत ने व्यापक कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। चुनावी अभियान शुरू होने से पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान जैसे खाड़ी देशों का दौरा किया। भारत इन देशों के साथ अपने मजबूत व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक संबंधों के आधार पर समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
भारत की रणनीति केवल समर्थन जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि यह मुकाबला किसी तरह की कड़वाहट में न बदले। ताजिकिस्तान भी भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग रहा है। इसलिए भारत संतुलित कूटनीति अपनाते हुए अपने हितों को आगे बढ़ा रहा है।
भारत ने कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन सहायता, खाद्यान्न आपूर्ति, मानवीय सहायता और विकासशील देशों के समर्थन जैसे अपने रिकॉर्ड को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से रखा है। माना जा रहा है कि अफ्रीका, एशिया और अरब देशों में भारत इन्हीं पहलों के आधार पर अतिरिक्त समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
कई देशों ने पहले ही भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, श्रीलंका और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों के नाम शामिल हैं। हालांकि अंतिम फैसला संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाले मतदान से ही होगा।
भारत इससे पहले भी कई बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। लेकिन 2027 का यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे भारत की भविष्य में UNSC की स्थायी सदस्यता के दावे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या भारत अपनी कूटनीति, वैश्विक साझेदारियों और ‘SHANTI’ विज़न के दम पर यह चुनाव जीतकर एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी जगह बना पाएगा।
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