पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा के बागी गुट के साथ जाने के फैसले के बाद सियासी बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मदन मित्रा के बदले हुए रुख के पीछे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई का दबाव हो सकता है।
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान महुआ मोइत्रा ने कहा कि यह घटनाक्रम उनके लिए बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं है। उनका कहना था कि एक दिन पहले ही ईडी ने मदन मित्रा की पत्नी, बेटों और बहुओं को पूछताछ के लिए समन भेजा था। महुआ ने तंज कसते हुए कहा कि मदन मित्रा किसी राजनीतिक बुलावे पर नहीं, बल्कि ईडी के बुलावे पर गए हैं।
महुआ मोइत्रा ने यह भी कहा कि जो नेता कुछ दिन पहले तक बागी गुट और उसके नेताओं की आलोचना कर रहे थे, वही अब उनके साथ बैठकर नई राजनीतिक शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नया राजनीतिक सफर उनके लिए अच्छा रहेगा और वे स्वस्थ रहें।
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल के कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में मदन मित्रा के परिवार के सदस्यों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। इसी घटनाक्रम के बीच मदन मित्रा के राजनीतिक फैसले ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हालांकि, मदन मित्रा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनके राजनीतिक फैसले का ईडी की कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल विधानसभा में अपना कमरा बदला है और इसे किसी जांच एजेंसी के दबाव से जोड़ना पूरी तरह गलत है।
बुधवार को मदन मित्रा ने औपचारिक रूप से बागी गुट के साथ अपनी नई राजनीतिक भूमिका का ऐलान किया। इस दौरान वे बागी गुट के प्रमुख नेता रिताब्रता बनर्जी के साथ मंच साझा करते हुए नजर आए। उनके इस कदम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में पहले से ही सत्तारूढ़ दल के भीतर जारी मतभेदों के बीच यह घटनाक्रम आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, ईडी की जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के चलते मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
फिलहाल ईडी की जांच अपनी प्रक्रिया के अनुसार जारी है और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे मामले का पश्चिम बंगाल की राजनीति और जांच प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है।
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