Saturday, May 30, 2026
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युद्धपोत देख भड़का चीन! डच नेवी पर समुद्री सीमा उल्लंघन का आरोप, सैन्य कार्रवाई से बढ़ा विवाद

दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। चीन ने नीदरलैंड की नौसेना के युद्धपोत डी रुएटर पर अपनी कथित समुद्री सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने का आरोप लगाया है। चीन का दावा है कि डच युद्धपोत ने न केवल उसके दावे वाले समुद्री क्षेत्र में प्रवेश किया, बल्कि वहां हेलीकॉप्टर संचालन भी किया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गईं।

चीनी सेना के दक्षिणी थिएटर कमांड के अनुसार, डच युद्धपोत शीशाद्वीप समूह के निकट पहुंचा और वहां सैन्य गतिविधियां संचालित कीं। इसके बाद चीन की नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए जहाज की निगरानी की और उसे चेतावनी जारी की। चीनी पक्ष का कहना है कि यह उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती थी।

बताया जा रहा है कि चीनी नौसैनिक जहाजों और लड़ाकू विमानों ने डच फ्रिगेट की लगातार निगरानी की। रेडियो संदेशों के जरिए चेतावनी दी गई और दोनों पक्षों के बीच सैन्य सतर्कता काफी बढ़ गई। हालांकि किसी प्रकार की सैन्य झड़प की सूचना नहीं है, लेकिन स्थिति बेहद संवेदनशील बनी रही।

वहीं पश्चिमी देशों का मत है कि दक्षिण चीन सागर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र का हिस्सा है और यहां सभी देशों को समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता प्राप्त है। अमेरिका और यूरोपीय देश लंबे समय से ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ अभियान के तहत इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजते रहे हैं। चीन इन गतिविधियों को उकसावे वाली कार्रवाई मानता है।

दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र से हर वर्ष खरबों डॉलर का वैश्विक व्यापार गुजरता है। इसके अलावा यहां तेल, प्राकृतिक गैस और समुद्री संसाधनों का भी बड़ा भंडार माना जाता है। यही कारण है कि चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रूनेई सहित कई देश इस क्षेत्र पर अपने-अपने दावे जताते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती हैं। यदि भविष्य में किसी भी पक्ष से छोटी सी चूक होती है, तो हालात गंभीर रूप ले सकते हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर दक्षिण चीन सागर को वैश्विक रणनीतिक और सुरक्षा चिंताओं के केंद्र में ला खड़ा किया है।

हालांकि दोनों देशों की ओर से फिलहाल किसी बड़े टकराव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान एक बार फिर इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र की ओर खींच लिया है।

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